सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रिश्तों में खटास आ गई है। एक समय दोनों देश एक-दूसरे के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे, लेकिन अब यह दोस्ती तनाव और टकराव में बदलती दिख रही है। सऊदी अरब ने साफ शब्दों में कहा है कि उसकी सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ है और उसकी रक्षा वह हर हाल में करेगा। सऊदी अरब पहले ही यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमला कर चुका है। इस हमले को लेकर सऊदी सरकार ने दावा किया है कि उस समय बंदरगाह पर UAE के जहाजों से हथियार उतारे जा रहे थे।
मुकल्ला पोर्ट पर हथियारों की अनलोडिंग का दावा
सऊदी अरब के अनुसार, अनलोडिंग के दौरान जहाज से घातक हथियार और हाई-सिक्योरिटी वाहन उतारे जा रहे थे। इन हथियारों को ऐसे गुटों को सौंपने की तैयारी थी, जिन्हें सऊदी अरब अपने सबसे खतरनाक दुश्मनों में गिनता है। सऊदी अरब ने यह भी कहा कि ये हथियार फुजैराह पोर्ट से भेजे गए थे और शिपमेंट के दौरान जहाज की ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखी गई थी। इन हथियारों को UAE समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को दिए जाने की बात कही गई है।
BIG: Saudi airstrikes hit Yemen’s Mukalla Port, targeting ships from the UAE carrying armored vehicles and weapons for UAE-backed Southern Transitional Council (STC) separatists.
— Clash Report (@clashreport) December 30, 2025
Tensions between Saudi-backed and UAE-backed forces have escalated sharply after pro-UAE forces… pic.twitter.com/ExPP78VVTz
UAE के सैनिकों को 24 घंटे का अल्टीमेटम
रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने UAE के सैनिकों को यमन छोड़ने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय शांति को खतरे से बचाने के लिए सीमित स्तर पर की गई और संपत्ति को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन मुकल्ला पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने इस कार्रवाई को आक्रामक कदम बताया है और UAE से सैन्य सहायता की मांग की है।
समझिए यमन की स्थिति
फ़िलहाल यमन तीन प्रमुख ताकतें सक्रिय हैं, यमन में जारी गृह युद्ध के बीच तीन गुट प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है, देश के बड़े हिस्से पर काबिज हैं। दक्षिणी इलाकों में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल, जिसे UAE का समर्थन माना जाता है, मजबूत स्थिति में है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।
देश तीन हिस्सों में बंटा हुआ
तीनों गुट यमन के अलग-अलग इलाकों पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, जिससे यमन व्यावहारिक रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ देश नजर आता है।
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