राज्यसभा में शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नए सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को बधाई देते हुए उनसे दोनों पक्षों के साथ समान व्यवहार करने की अपील की।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हुई बहस
खरगे ने अपने संबोधन में पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे का मुद्दा उठाया और इसे संसदीय इतिहास की ‘अभूतपूर्व घटना’ बताया। उन्होंने कहा कि सभापति का पद सरकार और विपक्ष दोनों के लिए समान रूप से जवाबदेह होता है और सदन की कार्यवाही का निष्पक्ष संचालन लोकतंत्र की प्रतिष्ठा के लिए ज़रूरी है।
सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति
संसदीय कार्यमंत्री किरेंन रिजिजू ने खरगे को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि नए सभापति के स्वागत जैसे “गंभीर अवसर” पर धनखड़ के इस्तीफे का उल्लेख करना अनुचित है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पूर्व सभापति धनखड़ का अपमान किया है और उनके खिलाफ 2 बार अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था।
चर्चा में जेपी नड्डा का भी हस्तक्षेप
सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष से अवसर की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि खरगे की टिप्पणी सौहार्दपूर्ण माहौल में बाधा डालने वाली है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर बिहार और हरियाणा की हार से “परेशान” होने का आरोप लगाया था।
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