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अजित पवार के बेटे की कंपनी पर आरोप, 1800 करोड रुपये की जमीन 300 करोड रुपये में कैसे खरीदी

पुणे में एक बडे़ जमीन सौदे पर विवाद शुरू हो गया है। मुंधवा की 40 एकड़ सरकारी जमीन कथित रूप से 1800 करोड रुपये के बजाय 300 करोड रुपये में बेची गई है।

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महाराष्ट्र की सियासत में एक बडा़ हंगामा खडा़ हो गया है और इसकी वजह है पुणे शहर की एक कीमती जमीन। यह मामला मुंधवा इलाके में फैली करीब 40 एकड़ जमीन का है, जिसका बाजार भाव 1800 करोड रुपये तक बताया जा रहा है, लेकिन इसे सिर्फ 300 करोड रुपये में बेच दिया गया। इस पूरे सौदे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि खरीददार कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम जुडा़ हुआ है। लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं और सबसे बडा़ सवाल यही है कि आखिर इतनी महंगी सरकारी जमीन इतने कम दाम पर किसी निजी कंपनी को कैसे मिल गई।

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कंपनी और जमीन के रिकॉर्ड में क्या गडबडी मिली

खरीददार कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी में पार्थ पवार और दिग्विजय अमर सिंह पाटिल साझेदार हैं। बिक्री के कागजात में दिग्विजय पाटिल का नाम खरीददार के तौर पर लिखा गया है। कंपनी ने यह जमीन मई महीने में खरीदी थी। सबसे बडी़ बात यह है कि इस सौदे के रजिस्ट्रेशन के वक्त 21 करोड रुपये की स्टाम्प ड्यूटी माफ कर दी गई और कंपनी ने सिर्फ 500 रुपये की फीस चुकाई। सामने आया है कि यह जमीन महार वतन श्रेणी की है जो खास समुदाय से जुडी़ होती है और इसे बेचने के लिए सरकार की खास इजाजत लेनी पडती है। मगर सरकारी रिकॉर्ड 7/12 उतारा में यह जमीन मुंबई सरकार यानी राज्य सरकार के नाम दर्ज थी फिर भी नियमों को ताक पर रखकर यह सौदा पास कर दिया गया।

सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई शुरू की

यह मामला सामने आने के बाद सरकार तुरंत हरकत में आई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद कहा कि यह मामला गंभीर लग रहा है और उन्होंने राजस्व विभाग से पूरी जानकारी मांगी है। सरकार ने जाँच के लिए एक ऊंचे स्तर की कमेटी बना दी है जिसके प्रमुख अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खरगे हैं। सबसे पहले तहसीलदार सूर्यकांत येवले को नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वे जमीन के रिकॉर्ड संभालते थे। इसके बाद सब रजिस्ट्रार रवींद्र तारु को भी सस्पेंड कर दिया गया, जिन्होंने कागजात पर मुहर लगाई थी। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बिना पूरी जाँच के और जरूरी एनओसी के बिना ही सौदा पास कर दिया, जिससे सरकार के खजाने को नुकसान हुआ।

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पुलिस ने तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया

इस मामले में पुणे पुलिस ने भी कडा़ कदम उठाया है। धोखाधडी़ और विश्वासघात का मुकदमा तीन लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। इन लोगों में कंपनी के साझेदार दिग्विजय पाटिल, जमीन बेचने वाले मूल मालिकों की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी रखने वाली शीतल तेजवाणी और सस्पेंड हुए सब रजिस्ट्रार रवींद्र तारु शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि फर्जी कागजात दिखाकर सरकारी जमीन को निजी हाथों में ट्रांसफर करने की कोशिश की गई है। पुणे के जिला कलेक्टर ने भी कहा है कि इस बिक्री के कागजात जल्द ही रद्द कर दिये जाएंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

इस मुद्दे पर सियासी माहौल गरमाया

विपक्षी दल इस मौके को हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं और लगातार सत्ता पक्ष पर हमले कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह एक बडा़ घपला है और सत्ता के दुरुपयोग का मामला है। वे कह रहे हैं कि इतनी कीमती जमीन इतने कम दाम पर खरीद कर नियमों को तोडा़ गया है। दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने खुद को इस सौदे से दूर बताते हुए कहा है कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है और अगर कोई गडबडी़ हुई तो सख्त सजा मिलेगी। आम जनता भी इस पूरे मामले को सोशल मीडिया पर पारदर्शिता की कमी बताकर लगातार चर्चा कर रही है। यह मामला आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को और ज्यादा गरमाने वाला है।

Keywords: Pune Mundhwa Land Deal, Parth Pawar Controversy, Government Property Sale Row Pune Land Irregularities, Ajit Pawar Son Controversy

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