तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर हुए कर्नूल बस हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। देर रात एक निजी बस और बाइक की टक्कर में करीब 20 लोगों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि बाइक सवार नशे की हालत में था और उसने नियंत्रण खो दिया, जिससे बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस एक लापरवाही ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया। ऐसे हादसे भारत की सड़कों पर आम होते जा रहे हैं। हर साल हजारों लोग शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण अपनी और दूसरों की जान गंवाते हैं। बावजूद इसके, लोग इसे ‘छोटी गलती’ मानकर दोहराते रहते हैं। यही बेपरवाही अब कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी है।
‘शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले आतंकवादी हैं’, कमिश्नर का सख्त रुख
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने कर्नूल हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाना “आतंकवाद से कम नहीं”। उनका कहना था कि “जो लोग नशे में वाहन चलाते हैं, वे सड़कों पर निर्दोष लोगों की जान से खेलते हैं। यह कोई गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया अपराध है।”
उन्होंने जनता से अपील की कि इस मानसिकता को बदलना होगा “शराब पीकर गाड़ी चलाना स्टाइल नहीं, अपराध है।” सज्जनार ने बताया कि हैदराबाद पुलिस ने इसके खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसका अर्थ है कोई रियायत नहीं, कोई माफ़ी नहीं। चाहे कोई आम नागरिक हो या प्रभावशाली व्यक्ति, अगर वह नशे में ड्राइविंग करते पकड़ा गया, तो कठोर कार्रवाई होगी।
पुलिस की सख्ती और जनजागरण अभियान
कमिश्नर ने कहा कि पुलिस अब केवल चालान काटकर नहीं रुकेगी, बल्कि नशे में ड्राइविंग के मामलों को आपराधिक श्रेणी में लाएगी। दोषियों के ड्राइविंग लाइसेंस कैंसिल किए जाएंगे और उन्हें जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही शहर में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि लोग समझें कि नशे में वाहन चलाना खुद और समाज दोनों के लिए घातक है। युवाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस सोशल मीडिया, कॉलेजों और क्लबों में भी जागरूकता फैलाने जा रही है। उनका उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता को खत्म करना है जो शराब को ‘मस्ती’ और ड्राइविंग को ‘रोमांच’ समझती है।
समाज की जिम्मेदारी
यह घटना सिर्फ कानून या पुलिस की विफलता नहीं, बल्कि समाज की सोच का प्रतिबिंब है। जब तक लोग खुद जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक सड़कें सुरक्षित नहीं हो सकतीं। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि नशे में वाहन चलाना आत्मघाती कदम है। अगर कोई दोस्त या परिवार का सदस्य नशे में ड्राइव करने की कोशिश करे, तो उसे रोकना भी हमारा कर्तव्य है। कर्नूल जैसी घटनाएं हमें चेतावनी देती हैं कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सम्मान का प्रतीक है। अगर हम समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो हर मोड़ पर ऐसी त्रासदियां हमें झकझोरती रहेंगी।
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