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शहरी महिलाएँ क्यों ज़्यादा पी रही हैं शराब? आज़ादी या तनाव?

भारत के बड़े शहरों में काम करने वाली युवा महिलाओं के बीच शराब का सेवन बढ़ गया है। यह आर्थिक मजबूती और बदलती जीवनशैली का प्रतीक है, पर साथ ही शहरी जीवन के बढ़ते तनाव को भी दिखाता है।

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भारत के बड़े शहरों में आजकल एक नई बात देखने को मिल रही है, जो है शहर की औरतों का शराब पीना। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि एक बड़ा बदलाव है जो समाज में चुपचाप हो रहा है। पहले जहाँ शराब पीना केवल पुरुषों तक सीमित था, वहीं अब पढ़ी-लिखी और नौकरी करने वाली महिलाएँ भी इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना रही हैं। यह बदलाव सिर्फ़ दिखावा नहीं है, बल्कि यह उनकी बदलती भूमिकाओं, बढ़ते पैसे और शहरी जीवन के भारी दबाव को भी दिखाता है।

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आज़ादी और पैसे की ताकत

महिलाएँ अब पहले से ज़्यादा पढ़ रही हैं और अच्छी नौकरियाँ कर रही हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। यह पैसे की आज़ादी उन्हें अपनी मर्ज़ी से जीने और अपनी पसंद की चीज़ों पर खर्च करने का मौका देती है, जिसमें सामाजिक समारोहों में शराब पीना भी शामिल है। अब पार्टियों, दोस्तों के साथ मीटिंग या बड़े समारोहों में महिलाओं के लिए शराब पीना पहले की तरह बुरा नहीं माना जाता है, क्योंकि समाज की सोच पहले से थोड़ी खुली हो गई है। विज्ञापन और बाज़ार वाले भी शराब को ‘मॉडर्न’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ से जोड़कर दिखाते हैं, जिससे युवा महिलाएँ इसकी तरफ़ और ज़्यादा खिंचती हैं।

शहरी भाग-दौड़ और तनाव से राहत

शहरों की तेज ज़िंदगी, करियर की होड़ और दफ़्तर-घर की ज़िम्मेदारियों को एक साथ संभालना महिलाओं के लिए बड़ा तनाव पैदा करता है। दफ्तर में अच्छा करने की चिंता और घर संभालने की जिम्मेदारी कई बार मानसिक थकावट देती है। ऐसे में कुछ महिलाएँ इस बढ़ते तनाव, अकेलेपन या चिंता को कुछ देर के लिए भूलने के लिए शराब को एक आसान और जल्दी राहत देने वाला रास्ता मान लेती हैं। कोविड महामारी के समय घर में बंद रहने, अनिश्चितता और ऑनलाइन शराब आसानी से मिलने के कारण भी कुछ महिलाओं ने पीना शुरू कर दिया था।

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बाज़ार का असर और आसानी से मिलना

बाज़ार में अब ख़ास तौर पर महिलाओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग स्वाद वाली और कम नशीली शराब आ गई है। ये ‘हल्के’ पेय उन्हें आकर्षित करते हैं जो पहले शराब से दूर रहती थीं। इन चीज़ों का प्रचार सीधे युवा और कामकाजी महिलाओं को देखकर किया जाता है, जिससे वे तेज़ी से इसकी ओर आकर्षित होती हैं। शराब आसानी से दुकानों और ऑनलाइन मिलने लगी है, जिससे यह ट्रेंड और तेज़ी से बढ़ रहा है। यह बात सही है कि अभी भी शराब पीने वाली महिलाओं की गिनती पुरुषों के मुकाबले बहुत कम है, लेकिन यह बढ़त मुख्य रूप से शहर की युवा कामकाजी औरतों में हो रही है। यह बदलाव एक तरफ़ उनकी बढ़ती आज़ादी को दिखाता है, तो दूसरी तरफ़ यह सवाल भी उठाता है कि क्या शहरी महिलाएँ अपने जीवन के तनाव से निपटने के लिए कोई और बेहतर रास्ता ढूंढ सकती हैं।

Keywords: Urban Indian Women Increasing Alcohol Use, Female Drinking Habits In Major Cities, Stress And Alcohol In Working Women

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