भारत सरकार को अलग-अलग तरीकों से धन मिलता है, जैसे टैक्स से, उधार लेने से, या दूसरे देशों से मदद से, और इस सारे धन का हिसाब रखना बहुत ज़रूरी होता है। यह जानना ज़रूरी है कि कौन यह देखता है कि हर एक रुपये का इस्तेमाल सही काम के लिए हो और यह पूरी व्यवस्था भरोसेमंद हो। इस बड़े काम को सही तरीके से करने के लिए देश की तीन बड़ी संस्थाएँ मिलकर काम करती हैं, जो सरकारी धन के प्रबंधन से लेकर उसके खर्च की जाँच तक की पूरी ज़िम्मेदारी संभालती हैं।
वित्त मंत्रालय: सरकारी धन का असली प्रबंधक
भारत सरकार के धन को सँभालने और उसका प्रबंधन करने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी वित्त मंत्रालय की होती है। यह मंत्रालय हर साल देश का केंद्रीय बजट तैयार करता है, जिसमें यह पूरा हिसाब होता है कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष में कहाँ से पैसा कमाएगी और कहाँ खर्च करेगी। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय यह भी पक्का करता है कि अलग-अलग सरकारी विभागों और जनता की भलाई के लिए बनी योजनाओं में धन को सोच-समझकर बाँटा जाए। टैक्स जमा करने से लेकर सरकार के कर्ज़ को संभालने तक, धन से जुड़ा हर ज़रूरी काम इसी मंत्रालय के पास होता है, और यह खर्च पर भी लगातार नज़र रखता है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG): खर्च की जाँच करने वाला
सरकारी धन का इस्तेमाल ठीक से हुआ है या नहीं, इसकी जाँच करने का अहम काम भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का होता है। सीएजी एक स्वतंत्र संस्था है, जिसे देश के संविधान से शक्ति मिली हुई है। इसका मुख्य काम सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और सरकारी कंपनियों की कमाई और खर्चों का हिसाब रखना और ऑडिट करना है। सीएजी यह देखता है कि सरकारी पैसा खर्च करते समय सभी नियमों का पालन हुआ है या नहीं। अगर CAG को सरकारी खर्च में कोई भी गड़बड़ या नियम टूटने का मामला मिलता है, तो वह इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करता है और उसे देश की संसद में रखता है, ताकि सरकार की जवाबदेही तय हो सके।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI): सरकार का बैंक
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भारत सरकार के ‘बैंकर’ के रूप में काम करता है। यह सरकार के सारे खातों को संभालता है, सरकारी कर्ज़ का प्रबंधन करता है, और सारे वित्तीय लेनदेन को आसान बनाने में मदद करता है। जब भी सरकार को कहीं भी पैसे का भुगतान करना होता है या पैसा प्राप्त होता है, तो वह सब RBI के माध्यम से ही होता है। इस तरह, RBI सरकार के दैनिक वित्तीय कामकाज को सही तरीके से चलाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। CAG की ऑडिट रिपोर्ट को सभी लोगों के लिए सार्वजनिक किया जाता है, जिससे संसद और देश के नागरिक सरकार से सवाल पूछ सकें और उसे ज़िम्मेदार ठहरा सकें, और यह पूरी व्यवस्था इस बात को पक्की करती है कि सरकारी खर्च हमेशा सबकी निगरानी में रहे।
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