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बाहुबल का वो ‘2000’ वाला खेल, जब 15 निर्दलीय बाहुबलियों ने नीतीश कुमार को पहली बार CM बनाया, पर 7 दिन में गिर गई सरकार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में फिर बाहुबलियों की चर्चा, लेकिन फ्लैशबैक में 2000 का चुनाव सबसे ख़ास, जब जेल से विधायक पहुंचे थे नीतीश को समर्थन देने।

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Bihar Election 2025 अपने परवान पर है। हमेशा की तरह बिहार चुनाव में बाहुबलियों की चर्चा हो रही है। इस बार कुछ बाहुबली खुद मैदान में हैं, तो कुछ पत्नी या रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारकर पर्दे के पीछे से अपनी राजनीतिक पैठ दिखाने के प्रयास में हैं।

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ऐसे में, हम आपको थोड़ा फ्लैशबैक में ले चलते हैं। बात है साल 2000 की, जब बिहार में हुआ विधानसभा चुनाव बाहुबलियों के लिए सबसे ज्यादा मुफीद रहा था।

2000: बाहुबलियों के लिए सबसे सुनहरा साल

साल 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड भी इसी प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। उस चुनाव में बिहार के अलग-अलग हिस्सों के अच्छे खासे बाहुबलियों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी।

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2000 में कुल 20 निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

2000 की तुलना में, 2020 का चुनाव आते-आते यह संख्या सिमटकर 1 पर आ टिकी थी। (चकाई से सुमित सिंह इकलौते निर्दलीय विधायक बने थे, जो 2025 में जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे हैं।)

7 दिन में क्यों गिर गई थी नीतीश की सरकार?

2000 में हुए चुनाव के बाद बिहार विधानसभा की कुल स्ट्रेंथ 324 विधायकों की थी, और बहुमत का जादुई आंकड़ा 163 था।

गठबंधन/पार्टीजीती गई सीटें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD)124
NDA (समता पार्टी, BJP, JD(S), JD(U) विलय से पूर्व)122
निर्दलीय20

बहुमत का आंकड़ा किसी भी गठबंधन को नहीं मिला। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली NDA सरकार थी, इसलिए NDA ने पहले सरकार बनाने का दावा पेश किया।

नीतीश कुमार बने CM

अटल बिहारी वाजपेयी की सलाह पर तत्कालीन समता पार्टी के नेता नीतीश कुमार को 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।

बहुमत जुटाने की जिम्मेदारी

नीतीश की सरकार के लिए बहुमत का जुगाड़ करने का जिम्मा बिहार बीजेपी के संस्थापक सदस्य कैलाशपति मिश्र को सौंपी गई।

बाहुबलियों से संपर्क कैलाशपति मिश्र ने अथक प्रयास से 20 में से 15 निर्दलीय विधायकों को नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए राजी कर लिया। बताया जाता है कि इसके लिए मिश्र जी जेल तक पहुंचे थे, जहाँ कई बाहुबली उस समय बंद थे।

विधानसभा में अजीब स्थिति

10 मार्च को जब नीतीश कुमार बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि कई बाहुबली विधायक (जैसे सूरज सिंह उर्फ सूरजभान सिंह, राजन तिवारी) सीधे जेल से उनके चैंबर में समर्थन देने पहुँचे थे। यह देखकर नीतीश कुमार थोड़े असहज हो गए।

इस्तीफा

दूसरी तरफ, विरोधी बाहुबली भी अन्य विधायकों को कैद करके जोड़तोड़ में लगे थे। राजनीतिक उठापटक और अपने चैंबर में बाहुबलियों की उपस्थिति से असहज हुए नीतीश कुमार ने बहुमत परीक्षण से पहले ही सरकार चलाने से मना कर दिया और 10 मार्च 2000 को महज 7 दिनों के कार्यकाल का द एंड कर दिया।

इस घटना ने बिहार की राजनीति में बाहुबलियों के प्रभाव को हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

2000 में जीतने वाले कुछ प्रमुख निर्दलीय विधायक (जो बाहुबली माने जाते थे)

क्षेत्रविधायक का नाम
मोकामासूरज सिंह उर्फ सूरजभान सिंह
लालगंजविजय शुक्ल (मुन्ना शुक्ला के भाई)
डुमरांवददन सिंह (ददन पहलवान)
गोबिंदगंजराजन तिवारी
चकाईनरेंद्र सिंह

Keywords: Bihar Election 2025, Warlords In Politics (Bahubali), Independent MLAs, Nitish Kumar CM, RJD Vs NDA

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