वजन घटाने की दुनिया में माउंजारो और ओजेम्पिक ने धूम मचा रखी है। ये दवाएं पहले डायबिटीज के लिए बनी थीं, लेकिन अब लोग इन्हें पेट कम करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों GLP-1 हार्मोन की नकल करती हैं, जो भूख को काबू में रखती हैं। माउंजारो खास है क्योंकि यह GLP-1 के साथ GIP हार्मोन पर भी काम करती है, जिससे वजन तेजी से कम होता है। SURMOUNT-5 अध्ययन के मुताबिक, माउंजारो से 72 हफ्तों में 20.2% वजन कम हुआ, जबकि ओजेम्पिक से 13.7%। अगर आप इन्हें आजमाने की सोच रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
दोनों दवाएं कैसे काम करती हैं
ओजेम्पिक में सेमाग्लूटाइड होता है, जो पेट को धीमा करता है, ब्लड शुगर कंट्रोल करता है और दिमाग को बताता है कि पेट भरा है। माउंजारो में तिरजेपाटाइड है, जो GLP-1 और GIP दोनों पर असर डालता है, जिससे भूख ज्यादा दबती है और चर्बी तेजी से जलती है। दोनों को हफ्ते में एक बार इंजेक्शन लगाना पड़ता है। माउंजारो 15 मिलीग्राम डोज से 20% से ज्यादा वजन कम कर सकती है, ओजेम्पिक 15-20%। भारत में इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
वजन घटाने में माउंजारो का जलवा
अध्ययनों से साफ है कि माउंजारो ओजेम्पिक से ज्यादा वजन कम करती है। पहले साल में माउंजारो वालों में 10% वजन कम करने की संभावना 2.5 गुना ज्यादा थी। ओजेम्पिक डायबिटीज और हार्ट के लिए भी अच्छी है, लेकिन वजन घटाने में माउंजारो का डबल एक्शन आगे है। डॉक्टर कहते हैं, यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। स्वस्थ खान-पान और व्यायाम के साथ इनका इस्तेमाल बेहतर नतीजे देता है।
साइड इफेक्ट्स और कीमत की चुनौती
दोनों दवाओं के साइड इफेक्ट्स जैसे मतली, उल्टी, डायरिया या कब्ज हो सकते हैं। माउंजारो में थायरॉइड कैंसर का थोड़ा जोखिम है। भारत में माउंजारो की कीमत 13,000-25,000 रुपये महीना और ओजेम्पिक 16,000-24,000 रुपये है। डायबिटीज के लिए इंश्योरेंस मिल सकता है, लेकिन वजन घटाने के लिए नहीं। भारत में सप्लाई सीमित है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के साथ ही इस्तेमाल करें।
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