सुहागिन महिलाओं के दिल में रहने वाला खास त्योहार करवा चौथ इस बार थोड़ा अलग तरह से मनाया जाएगा। ज्योतिष की गणना बता रही है कि इस बार चाँद चतुर्थी तिथि में दिखाई नहीं देगा, बल्कि वह पंचमी तिथि में चमकेगा। यह त्योहार 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए सुबह से शाम तक बिना पानी पिए व्रत रखती हैं। लेकिन इस साल चाँद रात 8 बजकर 14 मिनट पर निकलेगा, जो चतुर्थी तिथि के खत्म होने के बाद पंचमी तिथि में आता है। ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 9 साल बाद बन रहा है, जिससे सुहागिनों के मन में थोड़ी उत्सुकता है, लेकिन ज्योतिष विशेषज्ञ कह रहे हैं कि व्रत का फल पूरी तरह मिलेगा।
चतुर्थी तिथि की उलझन ने बढ़ाया इंतज़ार
हिन्दू पंचांग के हिसाब से, कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 10 अक्टूबर की शाम 7 बजकर 38 मिनट पर इसका समय पूरा हो जाएगा। व्रत 10 अक्टूबर को उदय तिथि के कारण ही रखा जाएगा, लेकिन चाँद का उदय (निकलना) इसके बाद रात 8 बजकर 14 मिनट पर होगा। इसका साफ मतलब है कि सुहागिन महिलाएँ चाँद को पंचमी तिथि में ही देखेंगी और उसे अर्घ्य देंगी। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि यह एक खास योग है, लेकिन शास्त्रों के हिसाब से व्रत का महत्व तिथि के शुरू होने पर निर्भर करता है, इसलिए अखंड सौभाग्य की उनकी कामना पूरी होगी। महिलाएँ सुबह सरगी खाने के बाद व्रत शुरू करेंगी और शाम को पूजा करने के बाद चाँद निकलने का बेसब्री से इंतज़ार करेंगी।
14 घंटे से ज्यादा लंबा व्रत, सुहाग की रक्षा का संकल्प
इस बार करवा चौथ का व्रत सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 14 मिनट तक चलेगा, यानी यह कुल साढ़े 14 घंटे से भी ज्यादा समय का होगा। सुहागिनें इस लंबी अवधि तक भूखी-प्यासी रहकर पति की लंबी उम्र के लिए मन से प्रार्थना करेंगी। धार्मिक ग्रंथों में इसे सौभाग्य बढ़ाने वाला त्योहार कहा गया है, जिसमें निर्जला व्रत रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में और ज्यादा मिठास आती है। दोपहर में पूजा-पाठ करने के बाद कथा सुनी जाएगी और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की पूजा की जाएगी। इसके बाद मिट्टी के करवे में रोली, चावल, हलवा और पूरी जैसी चीज़ें अर्पित की जाएँगी।
चाँद देखकर व्रत खोलने का तरीका
पुरानी परंपरा के अनुसार, रात को जब चाँद निकलता है तो छन्नी में दीपक रखकर पहले चाँद को देखते हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखते हैं। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है। इस साल चाँद पंचमी पर दिखने से सुहागिनों को थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ेगा, लेकिन ज्योतिष कहते हैं कि तिथि के उदय होने पर व्रत वैध माना जाता है। सुबह सरगी में फल और दूसरी चीज़ें खाई जाती हैं, ताकि दिन भर शरीर में ऊर्जा बनी रहे। पूजा का शुभ समय शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच रहेगा, जहाँ चौथ माता को पूजा की चीज़ें अर्पित की जाएँगी। यह सब मिलकर इस त्योहार को और भी खास बनाएगा।
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