14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत का मुंबई स्थित बांद्रा फ्लैट में निधन हुआ। इस मामले ने पूरी इंडस्ट्री और देश को झकझोर दिया। मामले में पुलिस ने सुशांत की कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती को हिरासत में लिया था और उन पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया। इसके बाद लगभग 4 साल 6 महीने तक यह मामला सुर्खियों में रहा। अंततः CBI ने जांच पूरी करके क्लोजिंग रिपोर्ट पेश की और रिया को क्लीन चिट दी।
रिया ने इस लंबे और तनावपूर्ण सफर को याद करते हुए कहा कि यह अवधि उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और जीवन बदल देने वाली रही। उन्होंने बताया कि चार साल से ज्यादा समय तक समाज और मीडिया के दबाव में रहना, हर दिन ट्रोलर्स और मुश्किलों का सामना करना आसान नहीं था।
CBI की जांच में 4 साल 6 महीने बाद रिया को मिली क्लीन चिट
CBI की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि रिया चक्रवर्ती के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। उन्हें सुशांत को मौत के लिए उकसाने का कोई दोषी साबित नहीं किया जा सका। जबकि सुशांत के पिता ने मामले की शुरुआत में रिया पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने ही उनके बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाया। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि सुशांत ने अपनी बहन से फोन पर कहा था कि रिया उन्हें रिपोर्ट पब्लिक करने और पागल साबित करने की धमकी दे रही थी।
CBI की जांच ने यह सब तथ्य उजागर कर दिए कि रिया ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे सुशांत की मौत की दिशा बदलती। यही कारण था कि रिया को क्लीन चिट दी गई। रिया ने मीडिया को बताया कि इस खबर ने उनके घर में भावनाओं का तूफ़ान पैदा कर दिया।
रिया ने याद किया वो भावुक पल
रिया ने बताया कि जब उन्हें यह खबर मिली कि CBI ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है, तो वह और उनके परिवार भावुक हो गए। वह कहती हैं, “उस दिन मेरे घर में सब रो पड़े। मैंने अपने भाई को गले लगाया और फूट-फूट कर रो पड़ी। जब मैंने अपने माता-पिता को देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि हम सब हमेशा के लिए बदल गए हैं। अब हम पहले जैसे बेफिक्र नहीं रहे।”
यह पल उनके लिए खुशी और राहत का मिश्रण था। चार साल से चल रही मानसिक पीड़ा और सामाजिक दबाव के बाद इस क्लीन चिट ने कुछ हद तक उनकी मानसिक राहत की स्थिति बनाई, लेकिन पूरी खुशी नहीं दी।
न्यूज़ चैनलों पर नहीं किया विश्वास
रिया ने आगे बताया कि शुरुआत में उन्होंने न्यूज चैनलों की रिपोर्ट पर विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा, “मुझे यकीन नहीं हुआ कि यह सच हो सकता है, मीडिया तो वैसे भी सच नहीं दिखाता। मैं तब तक इंतजार करती रही जब तक मेरे वकील ने मुझे इसकी पुष्टि नहीं की।” यह वाकया इस बात को उजागर करता है कि लंबे समय तक मीडिया की अफवाहें और अटकलें किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव डाल सकती हैं। रिया ने इसे अपने लिए मानसिक चुनौती और समाज के प्रति संवेदनशील अनुभव बताया।
खुशी नहीं, सिर्फ परिवार के लिए राहत
जब उनसे पूछा गया कि क्लीन चिट मिलने पर उनका अनुभव कैसा था, तो रिया ने कहा कि यह एक अजीब अनुभव था। उन्होंने स्पष्ट किया कि खुशी महसूस नहीं हुई क्योंकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, लेकिन उनके लिए यह महत्वपूर्ण था कि उनके माता-पिता को समाज में थोड़ी राहत मिली। “लोगों ने कहा कि वह तुम्हारी वजह से नहीं गया। मुझे हमेशा पता था कि मैंने कुछ नहीं किया है। लेकिन जब क्लीन चिट मिली, तब भी मुझे कोई खुशी नहीं हुई। मैं सिर्फ पैरेंट्स के लिए खुश थी। वो समाज में रहते हैं और लगातार लोगों का सामना करते रहते हैं। उनके लिए हालात बहुत मुश्किल हो गए थे। मुझे लगा कि शायद अब वो थोड़ा और आजादी से घूम-फिर सकेंगे।”
जीवन में बदलाव और भविष्य की चुनौतियां
रिया चक्रवर्ती ने इस पूरे अनुभव को जीवन बदल देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि उनका और उनके परिवार का जीवन अब पहले जैसा नहीं रहा। चार साल की जद्दोजहद ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत किया है, लेकिन पूरी तरह से सामान्य जीवन की ओर लौटने की प्रक्रिया अभी भी लंबी है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्हें उम्मीद है कि समाज धीरे-धीरे उनके अनुभव और इस मामले की सच्चाई को समझेगा। रिया ने कहा कि क्लीन चिट ने उन्हें अपनी पहचान बचाने और परिवार के लिए राहत पाने में मदद की, लेकिन सुशांत की मौत का गम और उस समय के अनुभव उन्हें हमेशा याद रहेंगे।
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