- Advertisement -

भारत के आगे बेबस दिखे अमेरिका के मंत्री, बोले- हमसे एक बोरी मक्का तक नहीं खरीदता ये देश’

भारत पर अमेरिका के भारी भरकम टैरिफ के बाद अमेरिकी मंत्री लुटनिक की बेबसी...बोले- फ्री मार्केट इकोनॉमी होने का दावा करने वाला भारत हमसे एक बोरी मक्का तक नहीं खरीदता।

4 Min Read

अमेरिका ने भारत पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगाया है… जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर तमाम अमेरिकी अधिकारी लगातार भारत की तरफ से लगाए जाने वाले हाई टैरिफ की दुहाई देते रहे हैं। अब अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हार्वर्ड लुटनिक ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने भारत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि नई दिल्ली वैश्विक व्यापार से तो भारी लाभ उठाती है, लेकिन खुद का बाज़ार विदेशी कंपनियों के लिए लगभग बंद रखती है।

- Advertisement -
Ad image

भारत की व्यापार नीति पर उठे सवाल

अमेरिका के वाणिज्य मंत्री लुटनिक ने भारत के संरक्षणवादी रुख पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और फ्री मार्केट इकोनॉमी होने का दावा करता है, लेकिन जब बात अमेरिकी उत्पादों की बिक्री की आती है, तो वह दीवारें खड़ी कर देता है। वो संरक्षणवादी रवैया अपनाता है। उन्होंने आगे कहा कि “भारत 140 करोड़ की आबादी पर गर्व करता है, लेकिन हमसे एक बोरी मक्का तक नहीं खरीदता।”

क्या है मक्का विवाद?

दरअसल अमेरिका चाहता है कि भारत उसकी कृषि उपज, विशेष रूप से मक्का के लिए अपने बाज़ार के दरवाज़े खोल दे। एक बुशल मक्का (यानी 25.4 किलोग्राम) का उदाहरण देते हुए उन्होंने तंज कसा कि भारत “एक बोरी मक्का” तक खरीदने को तैयार नहीं है। लुटनिक का कहना था कि अमेरिका भारतीय सामान खुले बाज़ार में स्वीकार करता है, लेकिन भारत उच्च टैरिफ, कोटा प्रतिबंध, और तकनीकी बाधाओं के जरिए अमेरिकी कृषि उत्पादों को रोक देता है।

- Advertisement -
Ad image

लुटनिक की टिप्पणी का मतलब क्या है?

किसी भी बाजार या सामानों की बिक्री को लेकर दांवपेच फंसता नजर आ रहा है। बात दरअसल ये हैं कि लुटनिक तर्क देते हैं कि भारत हर अमेरिकी कृषि उत्पाद पर टैरिफ लगाता है जबकि भारत की स्थिति अलग है। इससे भारत अपने किसानों को सुरक्षा देता है। वहीं मुक्त बाजार को प्राथमिकता देने की बात की जाए तो अमेरिका भारत को फ्री मार्केट ही नहीं मानता। जबकि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति को अपनाता है। निष्पक्षता को लेकर लुटनिक व्यापार में संतुलन का तर्क दे रहे हैं तो वहीं भारत का कहना है कि वह विकासशील देश है, उसे लचीलापन चाहिए।

आत्मनिर्भरता बनाम अमेरिकी दबाव

भारत की ओर से कोई औपचारिक बयान भले ही नहीं आया हो, लेकिन भारत की व्यापार नीति स्पष्ट रूप से घरेलू हितों को प्राथमिकता देती है। सरकार मानती है कि विदेशी कृषि उत्पादों को खोलना, घरेलू किसानों के लिए खतरा है।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी नीतियां देश के अंदर उत्पादन को बढ़ावा देती हैं।

WTO (विश्व व्यापार संगठन) के नियम विकासशील देशों को कुछ हद तक संरक्षण की अनुमति देते हैं।

अमेरिका का उद्देश्य?

  • भारतीय बाज़ार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की पैठ जमाना।
  • टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटवाना।
  • चीन के बाद भारत को एक बड़ा व्यापारिक भागीदार बनाना।

गौर करने वाली बात ये है कि लुटनिक की टिप्पणियां सिर्फ नाराज़गी नहीं जाहिर करती बल्कि भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की यह एक चाल भी है। जिसे भारत बखूबी समझता है।

बहरहाल भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं, लेकिन हालिया बयानबाज़ी ने इन्हें और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। जहां अमेरिका बाजार में निष्पक्षता की बात करता है, वहीं भारत घरेलू किसानों और उद्योगों की रक्षा को सर्वोपरि मानता है।

Keywords: Protectionism In Indian Trade, India US Corn Import Issue, Free Market Democracy India, US Commerce Secretary India Statement

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

लेटेस्ट
चुटकी शॉट्स
वीडियो
वेबस्टोरी
मेन्यू