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नया एआई स्टेथोस्कोप: 15 सेकंड में पकड़ता है हार्ट की 3 बीमारी, जानें कैसे करता है काम

आज के समय में हार्ट की बीमारियां दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती उम्र, गलत खानपान, तनाव, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी चीजें हार्ट पर बुरा असर डालती हैं।

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आज के समय में हार्ट की बीमारियां दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती उम्र, गलत खानपान, तनाव, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी चीजें हार्ट पर बुरा असर डालती हैं। कई बार हार्ट की समस्याएं इतनी चुपके से बढ़ती हैं कि लोग इन्हें सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सांस फूलना, सीने में हल्का दर्द, थकान या धड़कन का असामान्य होना जैसे लक्षण अक्सर हल्के लगते हैं, लेकिन ये गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। अगर समय पर इनका पता न चले, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन अब एक नई तकनीक इस खतरे को कम करने की उम्मीद लेकर आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस स्टेथोस्कोप सिर्फ 15 सेकंड में हार्ट की तीन बड़ी बीमारियों का पता लगा सकता है।

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क्या है यह नया स्टेथोस्कोप और कैसे काम करता है?

पारंपरिक स्टेथोस्कोप का इस्तेमाल 200 साल से ज्यादा समय से डॉक्टर करते आ रहे हैं। यह डॉक्टरों को शरीर के अंदर की आवाजें सुनने में मदद करता है। लेकिन नया एआई स्टेथोस्कोप इससे कई कदम आगे है। यह एक छोटा सा डिवाइस है, जो ताश के पत्ते जितना बड़ा है। इसे मरीज के सीने पर रखा जाता है। यह डिवाइस दो काम एक साथ करता है। पहला, यह हार्ट की धड़कन और खून के बहाव की बारीक आवाजें रिकॉर्ड करता है, जो इंसान के कान सुन नहीं सकते। दूसरा, यह एक सिंगल-लीड ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) रिकॉर्ड करता है, जो हार्ट की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को मापता है। इसके बाद यह डेटा क्लाउड पर भेजा जाता है, जहां एआई एल्गोरिदम इसे तुरंत एनालाइज करते हैं। ये एल्गोरिदम हजारों मरीजों के डेटा पर ट्रेन किए गए हैं, इसलिए ये छोटे-छोटे बदलावों को पकड़ लेते हैं। कुछ ही सेकंड में रिजल्ट स्मार्टफोन पर आ जाता है, जिससे डॉक्टर को पता चलता है कि मरीज को हार्ट की कोई समस्या है या नहीं।

किन बीमारियों का पता लगाता है यह डिवाइस?

यह एआई स्टेथोस्कोप तीन गंभीर हार्ट की बीमारियों को पकड़ सकता है। पहली है हार्ट फेलियर, जिसमें हार्ट इतनी ताकत से खून पंप नहीं कर पाता, जितना शरीर को चाहिए। इससे थकान, सांस लेने में दिक्कत और पैरों में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। दूसरी है एट्रियल फिब्रिलेशन, जिसमें हार्ट की धड़कन अनियमित हो जाती है। यह खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ाता है, जिससे स्ट्रोक हो सकता है। तीसरी है हार्ट वाल्व डिजीज, जिसमें हार्ट के वाल्व ठीक से काम नहीं करते। इससे खून का बहाव सही दिशा में नहीं होता, जिसका असर शरीर के बाकी अंगों पर पड़ता है। ये तीनों बीमारियां अगर समय पर पकड़ में न आएं, तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।

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क्या कहती है रिसर्च?

लंदन के इंपीरियल कॉलेज और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट ने इस डिवाइस का परीक्षण किया। TRICORDER नाम के इस अध्ययन में 200 से ज्यादा क्लिनिक्स में 12,700 मरीजों की जांच की गई। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिन मरीजों की जांच एआई स्टेथोस्कोप से की गई, उनमें हार्ट फेलियर का पता 2.3 गुना, एट्रियल फिब्रिलेशन का 3.5 गुना और हार्ट वाल्व डिजीज का करीब 2 गुना ज्यादा बार लगा। यह अध्ययन यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के वार्षिक सम्मेलन में पेश किया गया। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। करीब 70% क्लिनिक्स ने एक साल बाद इस डिवाइस का नियमित इस्तेमाल बंद कर दिया, क्योंकि इसे उनकी रोजमर्रा की प्रैक्टिस में शामिल करना मुश्किल लगा। फिर भी, शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर इसे सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकता है।

क्यों है यह तकनीक खास?

यह एआई स्टेथोस्कोप न सिर्फ तेज है, बल्कि इसे छोटे क्लिनिक्स में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सस्ता और सुविधाजनक है, जिससे आम लोग भी इसका फायदा उठा सकते हैं। यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए वरदान है, जिनके लक्षण हल्के होते हैं और जिन्हें समय पर इलाज की जरूरत होती है। यह डिवाइस जल्दी और सटीक नतीजे देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं। इससे न सिर्फ मरीजों की जान बच सकती है, बल्कि उनकी जिंदगी की क्वालिटी भी बेहतर हो सकती है।

Keywords AI Stethoscope, Heart Disease Detection, Heart Failure, Medical Technology, Healthcare Innovation

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