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Nepal Update: “सत्ता का स्वाद लेने नहीं आईं, सिर्फ 6 महीने रहूंगी”, सुशीला कार्की का साफ संदेश

दुनिया भारत
not here to taste power will stay only for 6 months sushila karkis clear message

काठमांडू के सिंहदरबार स्थित गृह मंत्रालय भवन में पदभार संभालने के बाद सुशीला कार्की ने अपने पहले संबोधन में जनता से सहयोग की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि अंतरिम सरकार महज छह महीने के लिए है और इसका मकसद केवल देश में स्थिरता बहाल करना है। उन्होंने कहा, “हम यहां सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हमारा लक्ष्य लोकतांत्रिक प्रणाली को पुनर्स्थापित करना और नई संसद को जिम्मेदारी सौंपना है। बिना जनता के सहयोग के यह संभव नहीं होगा।” यह बयान ऐसे समय आया है जब नेपाल भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से गहरे संकट में है।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और नई चुनौती

कार्की की नियुक्ति का सीधा संबंध उस ऐतिहासिक 27 घंटे लंबे आंदोलन से है जिसे नेपाल की जेन जेड पीढ़ी ने नेतृत्व दिया। इस विरोध ने न केवल काठमांडू घाटी को झकझोर दिया, बल्कि केपी शर्मा ओली सरकार की विदाई का रास्ता भी साफ कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई सरकारी परिसरों को निशाना बनाया, जिसके चलते मौजूदा पीएम कार्यालय को फिलहाल अनुपयोगी घोषित कर दिया गया है। अब गृह मंत्रालय को प्रधानमंत्री का अस्थायी कार्यालय बनाया गया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति और व्यवस्था बहाल करना है।

जनआंदोलन से उपजी उम्मीदें

कार्की ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि जेन जेड आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल नाराजगी का इजहार नहीं, बल्कि बदलाव की वास्तविक मांग है। आर्थिक समानता और भ्रष्टाचार उन्मूलन जैसे मुद्दे अब सिर्फ नारे नहीं रहे, बल्कि जनता की प्राथमिकता बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरिम सरकार इन मांगों को नीति स्तर पर आकार देने में सफल रहती है, तो यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ होगा। कार्की ने नौकरशाही को फिर से सक्रिय करने का निर्देश देकर यह संकेत दिया कि प्रशासनिक कामकाज में तुरंत सुधार की कोशिश होगी।

आगे की राह और नई कैबिनेट

अंतरिम प्रधानमंत्री ने विभागों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि सिविल सर्विस को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह जल्द ही अपने मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों की घोषणा करेंगी। जानकारों के अनुसार, कैबिनेट में युवा चेहरों और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कार्की के पास समय बहुत सीमित है, लेकिन अगर वह पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देकर काम करती हैं, तो यह नेपाल में लोकतांत्रिक पुनर्निर्माण का आधार बन सकता है। आने वाले छह महीने नेपाल की राजनीति और समाज के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।

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