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मराठी न बोलने पर पिटाई को लेकर भड़के मंत्री नीतीश राणे, कहा गरीब हिंदुओं की पिटाई गलत, हिम्मत है तो मुस्लिम इलाके में जाकर दिखाएं ताकत

मुंबई राजनीति
beating for not speaking marathi angers minister nitish rane says beating poor hindus is wrong challenges to show strength in muslim areas

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कथित तौर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा एक फूड स्टॉल के मालिक को मराठी में बात नहीं करने पर पीटने का मामला सामने आया था। अब इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राणे ने गुरुवार को कहा कि अगर हिंदू भाई को पीटने वालों में दम है तो मोहम्मद अली रोड और नालबाजार जाकर अपनी ताकत दिखाएं। इनसे भी मराठी सुनाई नहीं देता।

पूर्व सीएम नारायण राणे के बेटे नितेश राणे ने कहा कि राज्य सरकार इस घटना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि मराठी नहीं बोलने पर किसी के साथ इस तरह का सलूक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मीडिया से कहा कि इन लोगों ने गरीब हिंदुओं को मारा है। उन्होंने कहा कि अगर उनमें इतनी ही हिम्मत है तो नल बाजार, मोहम्मद अली रोड या मालवणी जैसे इलाकों में जाकर कहें कि मराठी बोलो। क्या वहां भी ऐसी हिम्मत दिखा सकते हो? उनमें वहां जाकर उन टोपी पहनने वालों की पिटाई करने का साहस नहीं है।

पिछले दिनों मुंबई में मराठी न बोलने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने एक दुकानदार के साथ मारपीट की थी। इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना को लेकर मंत्री नितेश राणे ने कहा कि इस पर राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

राणे ने कहा कि आमिर खान और जावेद अख्तर क्या मराठी में बोलते हैं? वहां तो कोई कुछ नहीं कहता। उन्होंने कहा, “गरीब हिंदू अगर हिंदी बोलते हैं तो उन्हें मारा जाता है जो भी हिंदुओं पर दादागिरी करेगा, उस पर हमारी सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। सरकार अब अपनी तीसरी आंख खोलेगी। हिंदुओं में फूट डालने की साजिश हो रही है, मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश हो रही है।

महाराष्ट्र में हाल में मराठी बनाम हिंदी की बहस एक बार फिर तेज हो गयी जब देवेंद्र फडणवीस सरकार ने आदेश जारी कर कहा कि पहली से पांचवी तक के स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी पढ़ाई जाएगी। इसे विपक्षी दलों ने बड़ा मुद्दा बनाया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई। भारी विरोध के बाद 29 जून को सरकार ने फैसला वापस ले लिया।

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