अमिताभ बच्चन के परिवार में एक ऐसी परंपरा चली आ रही थी, जिसे अगर जया बच्चन को निभाना पड़ता तो शायद बहुत अजीब स्थिति बन जाती। लेकिन अमिताभ के पिता, कवि हरिवंश राय बच्चन की समझदारी और हठ के कारण उस प्रथा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया।
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का परिवार भारतीय समाज में अपनी पुरानी विरासत, परंपराओं और अनुशासन के लिए जाना जाता है। बच्चन परिवार हमेशा से ही अपनी रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों का पालन करता आया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परिवार में एक समय ऐसी अनोखी रस्म प्रचलित थी, जिसमें सास अपनी नई बहू के पैर छूती थी और उसके साथ एक अजीब-सा वादा लिया जाता था?
बच्चन परिवार में होती थी यह अनोखी रस्म
अमिताभ बच्चन से लेकर अभिषेक बच्चन तक की शादियों को करीब से कवर करने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक पॉडकास्ट में इस परंपरा का ज़िक्र किया था। उन्होंने बताया था कि बच्चन परिवार में पहले एक रस्म हुआ करती थी, जब नई बहू घर में प्रवेश करती थी तो सास उसके पैर छूती थी। उस समय सास बहू से कहती थी “तुम डोली चढ़कर आई हो, मेरे घर बहू नहीं, बेटी बनकर आई हो।”इसके जवाब में बहू को कहना होता था “डोली चढ़कर आई हूं, अर्थी चढ़कर जाऊंगी।”यह सुनने में जितनी भावुक लगती है, उतनी ही विचित्र भी थी। क्योंकि इसका अर्थ था कि बहू इस घर से केवल मृत्यु के बाद ही विदा होगी।
हरिवंश राय बच्चन ने खत्म करवाई यह अजीब प्रथा
यह परंपरा हरिवंश राय बच्चन के समय तक जारी थी। उनकी पहली पत्नी श्यामा से उनकी शादी वर्ष 1926 में हुई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश 1936 में श्यामा का निधन हो गया। इसके बाद 1941 में हरिवंश राय बच्चन ने तेजी बच्चन से विवाह किया। शादी के समय जब यह रस्म निभाने की बात आई तो हरिवंश राय बच्चन ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी यह वाक्य नहीं बोलेगी। हरिवंश राय बच्चन ने खुद अपनी आत्मकथा में इसका उल्लेख किया था। उन्होंने लिखा था “मेरी पहली पत्नी डोली चढ़कर आई और अर्थी चढ़कर गई, लेकिन तेजी यह पंक्ति नहीं बोलेगी।” हरिवंश राय बच्चन का यह निर्णय न केवल एक प्रथा को खत्म करने वाला था, बल्कि समाज में महिला की गरिमा को सम्मान देने वाला भी था।
जया बच्चन को छूने पड़ते बहू के पांव
हरिवंश राय बच्चन के इस कदम के बाद यह परंपरा हमेशा के लिए समाप्त हो गई। अगर उन्होंने उस समय यह निर्णय न लिया होता, तो यह रस्म आज भी बच्चन परिवार में चली आ रही होती। ऐसे में कल्पना कीजिए अगर यह रिवाज आज भी जारी रहता, तो जया बच्चन को अपनी बहू ऐश्वर्या राय बच्चन के पैर छूने पड़ते।हरिवंश राय बच्चन ने उस दौर में जो फैसला लिया, वह अपने समय से बहुत आगे की सोच थी। उनकी इस पहल ने न सिर्फ बच्चन परिवार की एक पुरानी परंपरा को बदल दिया, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति सोच को भी एक नई दिशा दी।
Keywords: Bachchan Family Tradition Legacy