महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक नया संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसदों ने नेतृत्व से अलग रुख अपनाते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के प्रति समर्थन जताया है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह बदलाव औपचारिक रूप लेता है, तो राज्य की राजनीति में शक्ति संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है।
शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बागी रुख अपनाने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ने का फैसला करता है, तो उसे पहले अपना पद छोड़कर जनता के बीच जाना चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि पार्टी को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का जवाब राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। उनके अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता और समर्थक ऐसे घटनाक्रमों को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखी सीमित मौजूदगी
संजय राउत की मीडिया ब्रीफिंग में पार्टी के कुछ चुनिंदा सांसद ही उनके साथ नजर आए। इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा और कार्यकर्ताओं की मेहनत का जिक्र करते हुए कहा कि जनमत के आधार पर चुने गए प्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक फैसलों के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। राउत ने संकेत दिया कि यदि कोई नेता अलग राजनीतिक रास्ता चुनना चाहता है, तो उसे नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए पहले जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।
राउत ने जताई गंभीर चिंता
संजय राउत ने कहा कि फिलहाल पार्टी के पास किसी सांसद के आधिकारिक तौर पर अलग होने की पुष्टि नहीं है, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। राउत का कहना है कि यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बार-बार दल बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के विश्वास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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