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भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर; हिंदू पक्ष को मिली बड़ी राहत

मध्य प्रदेश भारत
major verdict in bhojshala dispute high court declares bhojshala a temple big relief for hindu side

मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में इसे मंदिर के रूप में मान्यता दी है और हिंदू पक्ष की याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने कहा कि यहां हिंदू पूजा-अर्चना की परंपरा कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार यह स्थान परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का केंद्र रहा है।

ASI रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट का फैसला

अदालत ने कहा कि विवादित स्थल पर हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। बेंच ने यह भी माना कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार यह स्थान “भोजशाला” था, जो राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में पुरातात्विक साक्ष्यों, ASI की रिपोर्ट और अधिसूचनाओं पर भी विचार किया। साथ ही, ASI एक्ट के प्रावधानों और अयोध्या मामले में तय कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे बहु-विषयक अध्ययन के निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।

भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के अहम निर्देश

हाई कोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका का निपटारा करते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि भोजशाला और कमल मौला मस्जिद क्षेत्र 18/3/1904 से अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित स्मारक है। कोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर सहित भोजशाला के रूप में जाना जाता है। इसके प्रबंधन और प्रशासन को लेकर केंद्र सरकार और ASI को आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। ASI इस संपत्ति का समग्र प्रशासन जारी रखेगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना, उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही स्थल की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप का संरक्षण भी जरूरी है।

भोजशाला को मिला मंदिर का दर्जा: हिंदू पक्ष के वकील

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि कोर्ट ने भोजशाला को राजा भोज का मंदिर माना है और हिंदू समाज को वहां पूजा का अधिकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक जमीन की मांग सरकार से कर सकता है। जैन के अनुसार हाई कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए स्थल के धार्मिक स्वरूप को मंदिर के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वहां पूजा-अर्चना की अनुमति होगी और इस संबंध में आज अंतिम नमाज संपन्न हुई है।

फैसले से पहले धार में कड़े सुरक्षा इंतजाम

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से पहले धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। 2022 में दायर याचिका पर कई सुनवाइयों के बाद 12 मई को फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे 15 मई को सुनाया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में धारा 163 लागू की गई और पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई। किसी भी तरह के धरना, प्रदर्शन और जुलूस पर भी प्रतिबंध लगाया गया। पुलिस सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर नजर रखे हुए है। साथ ही पेट्रोल-डीजल की बोतलों में बिक्री पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी है।

क्या है पूरा मामला?

भोजशाला विवाद हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच धार्मिक दावे को लेकर लंबे समय से चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल कमाल मौला की मस्जिद है। इसी मतभेद के कारण यहां अक्सर तनाव की स्थिति बनती रही है, खासकर वसंत पंचमी के अवसर पर।

यह मामला 2022 में तब शुरू हुआ जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्थल के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट करने और हिंदू समाज को अधिकार देने की मांग की। 2024 में ASI ने परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। इसके बाद 2026 में वसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई। अप्रैल 2026 से शुरू हुई नियमित सुनवाई 12 मई तक चली, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।

ASI रिपोर्ट में मंदिर के अवशेष और ऐतिहासिक प्रमाण मिले

हाई कोर्ट के आदेश पर 11 मार्च 2024 को ASI ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया, जो 98 दिनों तक चला। 15 जुलाई 2024 को सौंपी गई रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार परिसर में 106 स्तंभ और 82 प्लास्टर मिले, जिन्हें पुराने मंदिर संरचनाओं का हिस्सा बताया गया है और बाद में मस्जिद निर्माण में उपयोग किया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि स्तंभों पर देवताओं, शेर और हाथी जैसी आकृतियों को क्षतिग्रस्त किया गया था। इसके अलावा 10वीं-11वीं सदी के परमार कालीन शिलालेख और बाद के समय के सिक्के भी मिले। 2000 पन्नों से अधिक की इस रिपोर्ट में ASI ने निष्कर्ष निकाला कि यह स्थल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर रहा होगा।

हिंदू पक्ष ने नियमित पूजा और प्रशासनिक नियंत्रण की मांग रखी

हिंदू पक्ष की याचिका में कई प्रमुख मांगें रखी गई थीं। इसमें कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हिंदू समाज को भोजशाला परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया जाए। साथ ही परिसर में मुस्लिम पक्ष की धार्मिक गतिविधियों और नमाज पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग भी की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाकर भोजशाला के प्रशासन का नियंत्रण अपने हाथ में ले और मां सरस्वती की निरंतर पूजा सुनिश्चित करे। इसके अलावा ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की भी मांग की गई।

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