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हमारी बेटियों ने कर दिखाया कमाल, पहली बार विश्व कप जीतकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया

भारत स्पोर्ट्स
our daughters did a wonder surprised the whole world by winning the world cup for the first time

Photo Credit - @BcciWomen

भारत की बेटियों ने सच में इतिहास रच दिया है क्योंकि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप अपने नाम कर लिया और पूरी दुनिया देखती रह गई कि कैसे हमारे देश की खिलाड़ी मैदान पर छा गईं। नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में साउथ अफ्रीका को फाइनल में 52 रनों से हराकर टीम ने वह सपना पूरा किया जो सालों से हर क्रिकेट प्रेमी देखता आ रहा था। यह जीत सिर्फ एक मैच की जीत नहीं बल्कि लाखों लड़कियों के लिए नई उम्मीद की तरह चमकी जो अब बल्ला उठाने में और हिचकेंगी नहीं।

शानदार खेल से मिली जीत

मैच की शुरुआत में बारिश ने थोड़ा इंतजार कराया लेकिन जैसे ही खेल शुरू हुआ भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल दिखाया और 298 रन का मजबूत स्कोर खड़ा कर दिया। शफाली वर्मा ने 87 रनों की तेज पारी खेली तो दीप्ति शर्मा ने 58 रनों से टीम को संभाला और 45 रन स्मृति मंधाना ने जोड़े। ऋचा घोष ने 34 रनों की तेज तर्रार पारी से स्कोर को और ऊंचा उठाया। साउथ अफ्रीका की गेंदबाज आयाबोंगा खाका ने 3 विकेट लिए लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे वह बेअसर रहीं। जवाब में साउथ अफ्रीका 246 रन पर सिमट गई जहां दीप्ति शर्मा ने 5 विकेट झटके और शफाली ने 2 विकेट लेकर सबको हैरान कर दिया।

खुशी से झूम उठा पूरा स्टेडियम

ट्रॉफी हाथ में आते ही पूरा स्टेडियम तिरंगे के रंग में डूब गया और खिलाड़ी एक दूसरे को गले लगाकर नाचने लगीं। टीम ने पूरे मैदान का चक्कर लगाया और हजारों दर्शकों का हाथ हिलाकर शुक्रिया कहा जिन्होंने घंटों तक टीम को चीयर किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सबसे पहले कोच अमोल मजूमदार के पैर छुए और ट्रॉफी उनके हाथों में सौंपी क्योंकि इस जीत में कोच की मेहनत सबसे ज्यादा थी। कोच ने मुस्कुराते हुए ट्रॉफी उठाई और पूरी टीम को गले लगा लिया।

पुरानी साथी को दिया सम्मान

हरमनप्रीत कौर ट्रॉफी लेकर सीधे झूलन गोस्वामी के पास पहुंची जो कभी टीम की तेज गेंदबाज थीं और आज कमेंट्री कर रही थीं। जैसे ही झूलन ने ट्रॉफी छुई उनके आंसू निकल आए और उन्होंने हरमन को जोर से गले लगा लिया क्योंकि झूलन का सपना भी यही था कि भारत एक दिन विश्व चैंपियन बने। इसके बाद टीम मिताली राज के पास गई जिन्होंने सालों तक टीम की कप्तानी की। मिताली ने ट्रॉफी को प्यार से छुआ और खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाई। इन पुरानी खिलाड़ियों को सम्मान देना टीम का सबसे प्यारा तरीका था अपनी इस बड़ी जीत को मनाने का।

चोट के बावजूद दिखा गज़ब का जज्बा

ओपनर प्रतिका रावल सेमीफाइनल से पहले चोटिल हो गई थीं लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की थी। जीत के जश्न में वह व्हीलचेयर पर आईं लेकिन खुशी से खड़ी होकर नाचने लगीं। उनका यह जोश बताता है कि टीम में हर खिलाड़ी कितना मजबूत इरादा रखती है और वह देश के लिए कुछ भी कर सकती हैं।

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