असम के कार्बी आंगलोंग जिले में बीती रात भारतीय वायु सेना का Su-30MKI लड़ाकू विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान में दो पायलट थे, स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर। दोनों ने अपना फर्ज निभाते हुए जान गंवा दी। वायु सेना ने गहरा दुख जताया है और कहा है कि पूरे बल के लोग इन परिवारों के साथ खड़े हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ये विमान एक ट्रेनिंग मिशन पर था और जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद लापता हो गया। हादसा एयरबेस से करीब 60 किलोमीटर दूर हुआ।
Su-30MKI भारतीय वायु सेना की ताकत
Su-30MKI, दो सीटों वाला मल्टीपर्पज फाइटर जेट है। इसे रूस की सुखोई कंपनी ने डिजाइन किया, लेकिन अब HAL इसे भारत में ही बनाता है। वायु सेना के पास 260 से ज्यादा Su-30MKI हैं। ये विमान लंबी दूरी, तेज रफ्तार और सटीकता के लिए जाना जाता है। सच कहें तो, भारतीय वायु सेना की रीढ़ यही है।
Su-30MKI क्रैश की पुरानी घटनाएं
वैसे तो Su-30MKI को सबसे एडवांस और भरोसेमंद फाइटर जेट माना जाता है, लेकिन हादसे पहले भी हुए हैं। मई 2015 में तेजपुर एयरबेस से उड़ान के तुरंत बाद एक Su-30MKI क्रैश हुआ था, मगर दोनों पायलट समय रहते बाहर निकल गए थे। इसके बाद अगस्त 2019 में भी असम में ट्रेनिंग मिशन के दौरान ऐसा ही हादसा हुआ, उस बार भी पायलट बच गए। इन घटनाओं ने विमान की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर कई सवाल खड़े किए हैं, चाहे इसकी तकनीक कितनी भी एडवांस क्यों न हो।
IAF की प्रतिक्रिया और आगे की तैयारी
वायु सेना ने जांच के लिए तुरंत एक बोर्ड ऑफ इन्वेस्टिगेशन बना दिया है। अधिकारी साफ कह रहे हैं कि असली वजह जल्दी सामने आएगी। पूरे बल में शोक की लहर है और पायलटों को सलाम किया जा रहा है। Su-30MKI जैसे विमान भारतीय आसमान की हिफाजत में अहम रोल निभाते हैं, और इन बहादुर पायलटों की कुर्बानी हमेशा याद रखी जाएगी।
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