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बांदा कोर्ट ने 6 साल पुराने POCSO केस पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला, डार्क वेब पर बच्चों के शोषण मामले में दंपति को फांसी की सजा

क्राइम भारत
banda court delivers historic verdict on 6 year old pocso case couple sentenced to death for child exploitation on dark web

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की स्पेशल POCSO कोर्ट ने एक बेहद गंभीर केस में इतिहास बना दिया। कोर्ट ने पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई। मामला चित्रकूट इलाके से जुड़ा है और करीब छह साल पहले इसका खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया कि दोनों ने नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया, उनके अश्लील वीडियो बनाए और फिर वो वीडियो डार्क वेब पर बेच डाले।

राम भवन, जो सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था, और उसकी पत्नी दुर्गावती, दोनों को कोर्ट ने दोषी माना। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC), POCSO एक्ट और आईटी एक्ट की कई धाराएं लगीं। IPC की धारा 377 भी जुड़ी, क्योंकि यह अपराध सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से पहले हुआ था। कोर्ट ने फैसले में साफ कहा, ये अपराध “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” है और इसका असर पूरे समाज पर पड़ा है।

CBI जांच और डिजिटल सबूतों की निर्णायक भूमिका

मामला इतना संगीन था कि जांच CBI को सौंपी गई। अक्टूबर 2020 में गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने छानबीन शुरू की। जांच के दौरान बांदा और आसपास के इलाकों से बच्चों के यौन शोषण की कई शिकायतें सामने आईं। CBI ने राम भवन के घर छापा मारा तो वहां से करीब 8 लाख रुपये, 12 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक हार्ड ड्राइव और छह पेन ड्राइव बरामद हुईं। इन सबकी फोरेंसिक जांच में बाल यौन शोषण से जुड़ा काफी कंटेंट मिला। CBI ने बताया कि आरोपी बच्चों को बहला-फुसला कर वीडियो बनाते थे और फिर इन्हें एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डार्कनेट चैनलों पर बेचते थे।

एक और चौंकाने वाली बात ये थी कि इन वीडियो के खरीदार सिर्फ भारत में नहीं, विदेशों में भी थे। यानी मामला सिर्फ लोकल नहीं, इंटरनेशनल लेवल तक जुड़ा हुआ है। इससे ये भी साफ हो गया कि साइबर क्राइम और बच्चों की सुरक्षा अब और भी गंभीर चुनौती बन चुकी है।

पीड़ितों की संख्या और गवाहों की अहम गवाही

CBI की शुरुआती जांच में 33 नाबालिग पीड़ितों की पहचान हुई। आरोपपत्र में अलग-अलग उम्र के गवाहों के बयान थे, कुछ महज चार साल के, तो कुछ 22 साल तक के। इससे पता चलता है कि ये अपराध कितने लंबे वक्त तक चलता रहा। अदालत ने अपने फैसले में माना कि बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक तौर पर गहरा झटका लगा है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि हर पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। जांच के दौरान दुर्गावती ने गवाहों को डराने या प्रभावित करने की भी कोशिश की थी। कोर्ट ने इसे सीरियसली लिया और कहा, ये सिर्फ शोषण नहीं था, बल्कि कानून की प्रक्रिया में दखल देने की भी कोशिश थी।

ऑनलाइन बाल शोषण पर कड़ा संदेश और व्यापक असर

ये फैसला सिर्फ एक दंपति को सजा देने तक सीमित नहीं है। ये दिखाता है कि कोर्ट अब ऑनलाइन बाल शोषण के खिलाफ बिलकुल सख्त हो चुकी है। डार्क वेब और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भले अपराधियों को नए रास्ते दिखाए हों, लेकिन इसी टेक्नोलॉजी ने उन्हें पकड़वाने में भी मदद की। माना जा रहा है कि ये फैसला आगे ऐसे मामलों में नजीर बनेगा। साथ ही, ये पैरेंट्स, टीचर्स और प्रशासन, सबको चेतावनी है कि बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। जांच अभी भी चल रही है। दिल्ली से एक संदिग्ध की गिरफ्तारी भी हुई है। कुल मिलाकर, ये फैसला साफ संदेश देता है, बच्चों की सुरक्षा सबसे ऊपर है और ऐसे घिनौने अपराधों के लिए कोई जगह नहीं।

Keywords: Banda POCSO Court Verdict, Child Sexual Abuse Dark Web, CBI Investigation Digital Evidence, Online Child Exploitation Judgment

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