अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद भारत सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि हम इस संघर्ष-विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम साबित होगा। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को गंभीर कष्ट पहुंचाए हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार पर असर डाला है। भारत को उम्मीद है कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सुरक्षित नौवहन और वैश्विक वाणिज्य का प्रवाह बना रहेगा।
फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों को जल्द राहत
फारस की खाड़ी में भारत के 16 जहाज अभी रुकावटों के बीच खड़े हैं, जिनपर कुल 433 नाविक फंसे हुए थे। सीजफायर के बाद ये जहाज अब सुरक्षित रूप से लौटने की तैयारी कर रहे हैं। भारत पहुंचने में इन जहाजों को लगभग तीन दिन से एक हफ्ते का समय लग सकता है।
ट्रंप ने डेडलाइन से पहले किया सीजफायर का ऐलान
डेडलाइन से सिर्फ डेढ़ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा कर दी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों पक्षों ने विवादित मुद्दों पर सहमति बना ली है और दो हफ्तों के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भरोसा दिलाया है। साथ ही, अमेरिका ने अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर लिया है और उन्हें ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव बातचीत के लिए ठोस आधार लगता है।
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