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सुप्रीम कोर्ट का ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर सख्त रुख…सभी राज्यों को दिए ये निर्देश…CBI जांच की भी तैयारी

भारत क्राइम दुनिया
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फोटो क्रेडिट - X

‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने देश भर में हो रही इस नई तरह की धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों की विस्तृत जानकारी और स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, और साथ ही इस गंभीर मामले की CBI जांच कराने की इच्छा भी जताई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने धोखेबाजों द्वारा ठगी की शिकार एक बुजुर्ग महिला की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किए गए मामलों की सुनवाई 3 नवंबर के लिए स्थगित कर दी।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कितना गंभीर?

डिजिटल अरेस्ट एक साइबर अपराध है जिसमें अपराधी, सरकारी अधिकारी (जैसे पुलिस या CBI अधिकारी) या कानूनी एजेंसियों का प्रतिरूपण करते हैं। वे शिकार को वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हैं या उनके नाम पर कोई वारंट जारी हुआ है।

अपराधी पीड़ित को एक नकली वारंट या अरेस्ट मेमो दिखाते हैं और धमकी देते हैं कि अगर वे तुरंत एक निर्दिष्ट बैंक खाते में “सुरक्षा राशि” या “जुर्माना” जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वित्तीय धोखाधड़ी ही नहीं मौलिक अधिकारों का भी हनन

यह अपराध न केवल वित्तीय धोखाधड़ी है, बल्कि यह लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है और कानूनी प्रक्रिया में उनके विश्वास को भी खत्म करता है।

SC का सख्त आदेश और CBI जांच की मंशा

सुप्रीम कोर्ट ने इस खतरे की व्यापकता और अंतर-राज्यीय प्रकृति को देखते हुए इसे हल्के में न लेने का फैसला किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी दर्ज मामलों, की गई गिरफ्तारियों और चार्जशीट की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

CBI जांच

कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस राष्ट्रीय स्तर के संगठित साइबर अपराध की व्यापक और प्रभावी जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला एक राज्य की सीमा से बाहर का है, जिसके लिए एक केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है।

उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और कोर्ट ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे धोखाधड़ी वाले कॉल्स से सावधान रहें-

किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल पर कानूनी एजेंसियों का प्रतिरूपण करने वाले व्यक्ति पर तुरंत विश्वास न करें। हमेशा संबंधित पुलिस स्टेशन या आधिकारिक वेबसाइट पर कॉल करके दावे का सत्यापन करें। कोई भी वास्तविक सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी आपको गिरफ्तारी से बचने के लिए वीडियो कॉल पर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहेगा।

साइबर क्राइम पोर्टल पर करें शिकायत

अगर आपके साथ ऐसी घटना होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर या अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप देश में साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

Keywords: Digital Arrest In INDIA, Cyber Crime News, Cyber Fraud

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