भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हाल ही में एक महत्वपूर्ण चर्चा की। दोनों ने इस बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों और BRICS से जुड़े मुद्दों पर बात की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह वार्ता कल रात हुई और इसमें दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों पर भी ध्यान दिया गया।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत-ईरान की चर्चा
जयशंकर और अराघची की यह वार्ता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई। अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाया है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ गया है। यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% संभालता है और भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए बेहद अहम है।
जयशंकर-अराघची की लगातार चौथी बार हुई बात
जयशंकर और अराघची के बीच यह चौथी महत्वपूर्ण बातचीत है। इससे पहले 28 फरवरी, 5 मार्च और 10 मार्च को दोनों नेताओं ने फोन पर चर्चा की थी। वार्ताओं का मुख्य फोकस क्षेत्रीय संघर्ष, शिपिंग सुरक्षा और भारतीय जहाजों/टैंकरों के सुरक्षित मार्ग पर रहा। ईरानी पक्ष ने अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों को आक्रामक बताया और ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया, साथ ही ब्रिक्स जैसे मंचों से क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग की अपील की।
पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी संकट से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। भारत ने ईरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं और इजरायल के साथ भी मजबूत साझेदारी जारी है। यह वार्ता भारत-ईरान संबंधों को दर्शाती है, जिसमें चाबहार पोर्ट, ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे शामिल हैं। उच्च-स्तरीय संपर्क संकट के समय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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