दिल्ली में विपक्षी दलों की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें कई प्रमुख पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आ सकते हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद और देश के विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि, गठबंधन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक से दूरी बना ली है और कांग्रेस के रवैये को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इसके बावजूद विपक्षी खेमे को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में दल इस बैठक में शामिल होकर आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस बैठक में विपक्ष के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव तथा शिवसेना (उद्धव गुट) के उद्धव ठाकरे समेत करीब 23 विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी देखने को मिल सकती है। बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संसद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
23 दलों का शक्ति प्रदर्शन
इंडिया गठबंधन की बैठक को लेकर विपक्षी खेमे में व्यापक तैयारी की गई है। कांग्रेस का दावा है कि 23 राजनीतिक दलों ने इस बैठक में शामिल होने की सहमति दी है। हालांकि, कुछ सहयोगी दल अपने-अपने राजनीतिक कारणों से इस बार बैठक से दूर रह सकते हैं। आम आदमी पार्टी पहले ही गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि डीएमके ने भी बैठक में हिस्सा नहीं लेने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, तमिलनाडु की राजनीति में उभरती ताकत टीवीके को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि भविष्य में पार्टी विपक्षी गठबंधन के साथ नए समीकरण बना सकती है, हालांकि मौजूदा बैठक में उसकी भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रणनीति पर होगा मंथन
लंबे अंतराल के बाद विपक्षी दल एक बार फिर साझा मंच पर जुट रहे हैं। इस बैठक में आने वाले विधानसभा चुनावों, राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दों और केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त अभियान की रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष की कोशिश है कि वह खुद को एक मजबूत और संगठित विकल्प के रूप में पेश करे।
पोस्टर वॉर से गरमाई सियासत
इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पोस्टरबाजी ने माहौल गर्म कर दिया है। शहर के कई इलाकों में लगे पोस्टरों में विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों और आपसी मतभेदों को प्रमुखता से दिखाया गया है। पोस्टरों के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि जब गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच ही मतभेद हैं, तो वे मिलकर सरकार का मुकाबला कैसे करेंगे। इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विपक्ष ने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है।
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