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बांग्लादेश में यूनुस सरकार ने शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़ने से रोका, इलेक्शन से पहले गरमाई राजनीती

दुनिया भारत
yunus government blocks sheikh hasinas party from election politics heats up ahead of bangladesh polls

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में चुनावी माहौल गर्मा गया है, जहां मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोक दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हसीना ने यूनुस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश में लाखों लोगों का मताधिकार छीन लिया गया है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

शेख हसीना का तीखा आरोप

शेख हसीना ने हाल ही में एसोसिएटेड प्रेस (AP) को एक ईमेल भेजकर चेतावनी दी कि बांग्लादेश बिना समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लंबे समय तक अस्थिर रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जानबूझकर उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर किया, जिससे लाखों समर्थकों का मताधिकार छिन गया। हसीना ने इसे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ एक गंभीर कदम बताया।

“बहिष्कार से बनी सरकार नहीं जोड़ सकती देश”

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “जब बड़े हिस्से को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर किया जाता है, तो इससे असंतोष फैलता है, संस्थाओं की वैधता प्रभावित होती है, और भविष्य में अस्थिरता का माहौल बनता है।” उन्होंने यह भी कहा, “अगर सरकार बहिष्कार के आधार पर बनी है, तो वह एक विभाजित समाज को एकजुट नहीं कर सकती, और न ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती सुनिश्चित कर सकती है।”

12 फरवरी 2026 को है चुनाव

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव में 127 मिलियन से अधिक लोग वोट डालने के योग्य होंगे। यह चुनाव कई दशकों में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 2024 में हुए बड़े विद्रोह के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसमें शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। इस चुनाव की निगरानी यूनुस की अंतरिम सरकार कर रही है, जिसमें मतदाता राजनीतिक सुधारों और संवैधानिक जनमत संग्रह पर भी अपनी राय देंगे।

मोहम्मद यूनुस और अंतरिम सरकार की भूमिका

यूनुस अगस्त 2024 में बांग्लादेश लौटे थे और शेख हसीना के भारत जाने के तीन दिन बाद उन्होंने सत्ता संभाली थी। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया, लेकिन आलोचक यह सवाल उठा रहे हैं कि अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद क्या यह चुनाव प्रक्रिया वास्तव में समावेशी और लोकतांत्रिक होगी। इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी कई सवाल और अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

यूनुस सरकार का जवाब

यूनुस के कार्यालय ने AP को दिए गए एक बयान में कहा कि सुरक्षा बल चुनावों को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, और किसी को भी हिंसा या दबाव डालकर परिणामों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बयान में यह भी बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों को चुनाव के लिए आमंत्रित किया जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ सहित लगभग 500 विदेशी पर्यवेक्षक 12 फरवरी को होने वाले चुनावों की निगरानी करेंगे।

मीडिया पर उठे सवाल

हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने अंतरिम सरकार पर नागरिकों की सुरक्षा में नाकामी का आरोप लगाया है। अवामी लीग ने अपने नेताओं की अवैध गिरफ्तारी और हिरासत में मौतों का आरोप लगाया, जिसे सरकार ने नकारा है। आलोचकों का कहना है कि इस्लामी समूहों का प्रभाव बढ़ रहा है, और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। इसके अलावा, यूनुस सरकार के तहत प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां कई पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और दो प्रमुख समाचार पत्रों के दफ्तरों पर हमले हुए हैं।

नया सियासी समीकरण

इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) तारिक रहमान के नेतृत्व में प्रमुख दावेदार के रूप में उभरी है। रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं, 17 साल से अधिक समय तक निर्वासन में रहने के बाद दिसंबर में बांग्लादेश लौटे थे। उन्होंने देश की 170 मिलियन की आबादी के लिए स्थिरता सुनिश्चित करने का वादा किया है। BNP के मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व में 11 दलों का गठबंधन सामने आया है।

Keywords: Bangladesh Election 2026, Sheikh Hasina Reaction, Muhammad Yunus Interim Government

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