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ईरान की इस शर्त पर अमेरिका हुआ राजी, खुल सकता है State Of Hormuz का रास्ता?

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us agrees to irans condition could this open the route to the strait of hormuz

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US Iran Peace Talks in Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की एक प्रमुख शर्त को स्वीकार कर लिया है। बताया जा रहा है कि कतर और अन्य बैंकों में जमा ईरानी धनराशि को जारी करने पर सहमति बनी है। ईरानी पक्ष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे बातचीत में प्रगति और समझौते की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया है। माना जा रहा है कि यदि प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति बदल सकती है, जिस पर ईरान अपना नियंत्रण और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहा है।

इस्लामाबाद में हाई-लेवल डेलिगेशन की मौजूदगी

छह हफ्ते चले संघर्ष को खत्म करने के मकसद से ईरान और अमेरिका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में मौजूद हैं। हालांकि ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि लेबनान और प्रतिबंधों के मुद्दे पर ठोस आश्वासन के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के विमान पाकिस्तान वायुसेना के एयरबेस पर उतरे, जहां सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने उनका स्वागत किया।

ऐतिहासिक मुलाकात की संभावना

ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची कर रहे हैं, जो शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह अमेरिका और ईरान के बीच अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय बातचीत मानी जा रही है। अगर दोनों पक्ष आमने-सामने बातचीत करते हैं, तो यह 2015 के बाद पहली सीधी मुलाकात होगी, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता हुआ था। बाद में 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समझौते को खत्म कर दिया था। इसी साल ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत पर रोक लगा दी थी।

ईरान-अमेरिका वार्ता पर बढ़ा तनाव, शर्तों पर टिकी बातचीत

ईरान के नेता मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि अमेरिका पहले ईरानी संपत्तियों पर लगे प्रतिबंध हटाने और लेबनान में युद्धविराम पर सहमत हुआ था। मार्च से जारी संघर्ष में हिज्बुल्लाह लड़ाकों पर इजरायली हमलों के चलते करीब 2 हजार लोगों की मौत की बात भी सामने आई है। कालिबफ ने साफ कहा कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी।

हालांकि इजरायल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान में चल रहा ऑपरेशन किसी भी ईरान-अमेरिका युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल दोपहर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर बातचीत के समय और प्रक्रिया पर फैसला करेगा।

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बयानबाजी तेज

ईरान के एक वरिष्ठ नेता ने रॉयटर्स को बताया है कि पाकिस्तान में अमेरिका, ईरान की मांगों पर शुरुआती प्रतिक्रिया देगा। अगर यह प्रतिक्रिया स्वीकार हो जाती है, तो दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि ईरानियों के जीवित रहने का एकमात्र कारण बातचीत करना और समझौते की कोशिश करना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता है, लेकिन उसके पास इससे ज्यादा कोई मजबूत विकल्प नहीं है।

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