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अमेरिका के विरुद्ध RIC फॉर्मेट की बहाली!, क्या अपने ही जाल में फंसे ट्रंप

दुनिया भारत
the nexus between india russia and china amidst americas bar is a big problem for trump

Photo courtesy - Press Information Bureau

भारत ने गुरुवार को संकेत दिया कि रूस-भारत-चीन (आरआईसी) तंत्र का फिर से तीनों देशों की पारस्परिक सुविधा पर निर्भर करता है। दिल्ली की यह टिप्पणी चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा यह कहे जाने के कुछ घंटों बाद आई है कि बीजिंग आरआईसी तंत्र को पुनर्जीवित( revive )करने की रूस की पहल का समर्थन करता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह कंसल्टेशन फॉर्मेट एक ऐसा उपाय है, जहां तीनों देश आते हैं और अपने हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि जहां तक इस विशेष आरआईसी बैठक के आयोजन का सवाल है, तो यह ऐसा मामला है जिस पर तीनों देश पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तरीके से काम करेंगे।

लद्दाख गतिरोध के कारण भारत-चीन संबंधों में चार साल से ज़्यादा समय तक ठहराव रहा। पिछले साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों में फिर से जान आई है। तब से दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए लगातार वार्ता चल रही है।

चीन ने गुरुवार को ठंडे बस्ते में पड़ चुके रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग को फिर से शुरू करने की वकालत की है। पहले रूस की तरफ से यह पहल की गई थी, जिसका बीजिंग ने समर्थन किया है। चीन ने कहा कि रूस, भारत और चीन का त्रिपक्षीय सहयोग न सिर्फ तीनों देशों के हित में है, बल्कि क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी काफी अहम है।

रूसी समाचार पोर्टल इज़वेस्टिया ने गुरुवार को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के हवाले से कहा कि मास्को RIC फॉर्मेट की बहाली की उम्मीद करता है और इस मुद्दे पर बीजिंग और नई दिल्ली के साथ बातचीत कर रहा है। रुडेन्को ने कहा, ‘यह मुद्दा दोनों के साथ हमारी बातचीत का हिस्सा है। हम इस फॉर्मेट को सफल बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि ब्रिक्स के संस्थापकों के अलावा ये तीनों देश अहम साझेदार भी हैं।

रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा, ‘मेरी राय में इस फॉर्मेट की कमी सही नहीं लगती। इस बारे में हम उम्मीद करते हैं कि देश RIC के ढांचे के भीतर काम फिर से शुरू करने पर सहमत होंगे।

मीडिया ब्रीफिंग में रुडेन्को के बयान पर रिएक्ट करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को कहा, ‘चीन-रूस-भारत सहयोग न सिर्फ तीनों देशों के संबंधित हितों को पूरा करता है, बल्कि क्षेत्र और विश्व में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और प्रगति को बनाए रखने में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि चीन त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रूस और भारत के साथ डायलॉग बनाए रखने को तैयार है।

आरआईसी की बहाली में रूस और चीन की रुचि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर की SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन यात्रा के बाद बढ़ी है। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री वांग यी और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव समेत टॉप चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी।

लावरोव ने पिछले साल कहा था कि आरआईसी फॉर्मेट में जॉइंट वर्क पहले कोरोना वायरस के कारण और बाद में 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध के कारण रुक गया था।

विदेश मंत्री जयशंकर की हालिया यात्रा, एनएसए अजीत डोभाल और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीन यात्रा के बाद हुई है। लावरोव ने मई में कहा था कि रूस, जिसके भारत और चीन के साथ मजबूत संबंध हैं, आरआईसी फॉर्मेट की बहाली में वास्तव में रुचि रखता है।

उन्होंने कहा कि रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव की ओर से शुरू की गई त्रिपक्षीय व्यवस्था के तहत तीनों देशों के बीच अलग-अलग स्तरों पर 20 बैठकें हुई हैं। ये तीनों देश ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) और इस ग्रुप के न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के गठन में प्रमुख भूमिका में थे, जिसमें अब 10 सदस्य हैं।

भारत और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और बीजिंग की ओर से अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को उसकी भारत विरोधी गतिविधियों में लगातार समर्थन देने सहित अनेक मुद्दों ने RIC की प्रासंगिकता और महत्व को कम कर दिया है। हाल ही में, आरआईसी की बहाली में रूस और चीन की रुचि बढ़ रही है, क्योंकि भारत क्वाड का सदस्य बन गया है। यह अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का उभरता हुआ गठबंधन है, जिसे बीजिंग अपने प्रभाव को रोकने के मकसद से तैयार एक ग्रुप के तौर पर देखता है।

keywordNew US tariffs, Russia, India vs USA, China, Putin, RIC

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