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अंतिम संस्कार के दौरान पसरा था मातम, तभी जनाजे में अचानक हुई ‘मुर्दे’ की एंट्री फिर…

दुनिया
funeral preparation shock as dead man returns alive

प्रतीकात्मक तस्वीर ( Credit - Grok (x)

दुनिया में कभी-कभी ऐसी घटनाएं होती हैं, जिन्हें सुनकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। अर्जेंटीना में एक युवक की गलती से हुई मौत ने यही हालात पैदा कर दिए। बीते 18 सितंबर को एक युवक गन्ना ट्रक से कुचल गया और उसकी हालत देखकर पुलिस ने उसे मृत मान लिया। शुरू में इसे आत्महत्या का मामला समझा गया, लेकिन बाद में इसे लापरवाही से हुई मौत माना गया। युवक की लाश को जांच के लिए भेजा गया, लेकिन अगले ही दिन एक महिला पुलिस स्टेशन पहुंची और दावा किया कि शव उसका बेटा है। महिला ने कपड़े और शरीर पर निशानों से बेटे की पहचान की। पुलिस ने बिना ज्यादा जांच किए शव परिवार को सौंप दिया और रविवार को अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गई।

अंतिम संस्कार में अचानक प्रकट हुआ युवक

जैसे ही अंतिम संस्कार चल रहा था, अचानक वही युवक, जिसे मृत समझा जा रहा था, वहां खुद चलकर पहुंच गया और जोर से बोला, “मैं जिंदा हूं!”। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। अफरा-तफरी मच गई और लोग समझ नहीं पाए कि आखिर यह कैसे हो गया। युवक ने बाद में बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से शराब पीकर पास के शहर एल्डरेटस में घूम रहा था और उसे घर पर चल रहे इस नाटक की कोई खबर नहीं थी। युवक को तुरंत थाने ले जाया गया और वहां पूछताछ की गई। साथ ही, ताबूत में रखी गई लाश को वापस मुर्दाघर भेजा गया। जांच में पता चला कि ताबूत में रखा शव वास्तव में 28 वर्षीय मैक्सिमिलियानो एनरिक एकोस्टा का था, जो पड़ोसी शहर डेल्फिन गैलो का निवासी था।

पुलिस की लापरवाही से परिवार को हुई परेशानी

इस घटना ने साफ तौर पर दिखाया कि कैसे पुलिस की लापरवाही एक परिवार को झूठा सदमा दे सकती है और दूसरे परिवार को अपने मृत सदस्य के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मैक्सिमिलियानो के असली परिवार को शव सौंपा गया और 23 सितंबर को उनके गृहनगर में उनका अंतिम संस्कार हुआ। हालांकि, पुलिस की भूल से उनका परिवार दो बार मुर्दाघर का चक्कर लगाने को मजबूर हुआ। मैक्सिमिलियानो के भाई हर्नान ने गुस्से में कहा, “हमें अपने भाई की पहचान के लिए बुलाया गया, लेकिन अधिकारियों ने किसी और की लाश हमें दे दी। यह बहुत बड़ी लापरवाही थी। हमें इतनी परेशानी नहीं होनी चाहिए थी।” इस मामले के बाद पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऐसी गंभीर गलती कैसे हुई।

अंत में इंसानी भावनाओं की परीक्षा

यह पूरा मामला न केवल पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि इंसानी भावनाओं की जटिलता को भी सामने लाता है। एक परिवार को झूठा सदमा और चिंता झेलनी पड़ी, जबकि दूसरे परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के लिए लड़ना पड़ा। इस घटना ने यह भी साबित किया कि कभी-कभी सच और झूठ के बीच की रेखा इतनी पतली होती है कि एक छोटी गलती भी भारी परिणाम ला सकती है।

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