- Advertisement -
- Advertisement -

बनारस के मणिकर्णिका घाट पर बुलडोज़र चलाने से जनता में उबाल, प्रशासन को सामने आकर देना पड़ा जवाब

उत्तर प्रदेश भारत
bulldozer action at varanasis manikarnika ghat sparks public outrage administration forced to respond

काशी: हजारों सालों से लोग मणिकर्णिका घाट को मोक्ष का दरवाजा मानते आए हैं। वाराणसी का यह घाट सिर्फ एक धार्मिक जगह नहीं, बल्कि काशी की पहचान में भी गहराई से बसा हुआ है। यहां माना जाता है कि जो भी इंसान अंतिम संस्कार के लिए आता है, उसकी आत्मा जन्म-मरण के चक्कर से आज़ाद हो जाती है। इतने लंबे वक्त से घाट पर पूजा-पाठ, संस्कार और रिवाज चलते आ रहे हैं।

लेकिन हाल ही में जब सरकार ने घाट और उसके आसपास के इलाकों को चौड़ा करने और सुविधाएं बढ़ाने का काम शुरू किया, तो बवाल मच गया। बुलडोज़र चलने लगे, वीडियो वायरल हुए, और सोशल मीडिया पर लोग भड़क उठे। स्थानीय लोग, पुजारी और इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले सब सड़कों पर उतर आए।

https://twitter.com/whois_rishi/status/2010619347019141256?s=20

ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने का आरोप

लोगों का आरोप है कि इस काम में कई पुराने मंदिरनुमा ढांचे, मूर्तियां और ऐतिहासिक निशान टूट गए। सबसे ज्यादा गुस्सा उस छोटे मंदिर के टूटने पर है, जिसे देवी अहिल्याबाई होलकर से जोड़ा जाता है। अहिल्याबाई होलकर को वैसे भी देशभर में मंदिरों और घाटों को संवारने के लिए याद किया जाता है। आलोचक कह रहे हैं कि ये ढांचे सिर्फ पत्थर या ईंट नहीं, बल्कि हमारी यादों, परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे “इतिहास का निर्मम विनाश” बता रहे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर संस्कृति को ही मिटाया जा रहा है।

https://twitter.com/adnightowl95/status/2011836859626979586?s=20

पारदर्शिता पर उठा सवाल

अब मामला राजनीति तक पहुंच चुका है। कई नेता और बुद्धिजीवी सामने आए हैं। एनसीपी की सुप्रिया सुले ने कहा कि मणिकर्णिका घाट जैसा ऐतिहासिक स्थल अगर बदलता है, तो ये बड़ी चिंता की बात है।

https://twitter.com/supriya_sule/status/2011404578902978667

वहीं, लेखिका और इतिहासकार सहाना सिंह ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की है। उनका सवाल है, घाट के नए रूप की तस्वीर साफ क्यों नहीं की जा रही? हिंदू स्थापत्य के पारंपरिक रंग-रूप को बचाने की ठोस योजना कहां है? जो मूर्तियां और प्रतिमाएं हटाई गईं, उन्हें सुरक्षित रखने का कोई इंतजाम क्यों नहीं दिखता?

कशी को बदनाम करने की कोशिश: सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष अजय राय ने किया पोस्ट

विकास और संवेदनशीलता के बीच संतुलन की चुनौती

दूसरी तरफ, जो लोग विकास के पक्ष में हैं, उनका तर्क है कि भीड़, सुरक्षा और सफाई के लिए नई सुविधाएं जरूरी हैं। घाट के रास्ते तंग हैं, जगह कम है, और कई बार अव्यवस्था से हादसे हो जाते हैं। लेकिन विरोध करने वाले कहते हैं, मणिकर्णिका घाट जैसे जगह सिर्फ सीमेंट-ईंट की बात नहीं है। यहां हर पत्थर का मतलब है, हर दीवार का इतिहास है।

अभी तो सवाल यही है—क्या हम अपनी आस्था और इतिहास को बचाते हुए आगे बढ़ सकते हैं, या फिर तेज़ रफ्तार विकास की दौड़ में कुछ जरूरी चीजें पीछे छूट जाएंगी?

Keywords: Manikarnika Ghat, Varanasi Redevelopment, Hindu Cremation Ground, Ahilyabai Holkar, Religious Sensitivity

What do you think?

- Advertisement -