पाकिस्तान में रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की नेता सुमेटा अफ़ज़ल सैयद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि फिल्म में बेनज़ीर भुट्टो की तस्वीरें बिना अनुमति के इस्तेमाल की गई हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म ने भुट्टो को नकारात्मक तरीके से पेश किया है, जिससे न सिर्फ उनकी गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि पार्टी के विचारों को भी गलत तरीके से दिखाया गया है। सैयद ने इसे PPP के इतिहास और आतंकवाद विरोधी नज़रिये पर हमला बताया और पाकिस्तान के अधिकारियों से इस पर ध्यान देने की अपील की।
आतंकवाद के खिलाफ सबसे मज़बूत आवाज़
सुमेटा अफ़ज़ल सैयद ने अपने बयान में खास तौर पर यह बताया कि PPP हमेशा आतंकवाद के खिलाफ रही है और इसके लिए पार्टी ने कई बड़े बलिदान दिए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पार्टी और उसके नेताओं ने आतंकवादी हमलों का सामना किया है। इस संदर्भ में, फिल्म में PPP को आतंकवाद समर्थक या उसकी विचारधारा को कमजोर दिखाना गलत और नैतिक रूप से गलत ठहराया गया। PPP का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो न केवल पाकिस्तान, बल्कि दुनिया भर में लोकतांत्रिक नेतृत्व की प्रतीक रही हैं, और उनकी छवि से छेड़छाड़ दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।
‘धुरंधर’ की कहानी
आदित्य धर द्वारा निर्देशित धुरंधर एक हाई एनर्जी वाली इंडियन स्पाई थ्रिलर है, जिसमें रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे बड़े स्टार्स हैं। फिल्म एक अंडरकवर एजेंट की कहानी है, जो पाकिस्तान में छिपे आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट करने के मिशन पर है। इसकी कहानी भारतीय उपमहाद्वीप के वास्तविक इतिहास पर आधारित है, जिसमें IC-814 हाईजैकिंग और 2001 संसद हमले जैसे प्रमुख घटनाएं शामिल हैं। हालांकि फिल्म को मिक्स रिएक्शन मिलीं, दर्शकों ने इसे पसंद किया और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, इसकी राजनीतिक टोन और पाकिस्तान की छवि को लेकर बहस जारी है।
पहले भी घिर चुकी है फिल्म कई विवादों में
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब ‘धुरंधर’ विवादों में घिरी है। रिलीज़ से पहले, मेजर मोहित शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया था कि फिल्म के प्रमोशनल सामग्री में उनके शहीद बेटे की कहानी बिना अनुमति के दिखाई गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने से इंकार कर दिया, लेकिन सेंसर बोर्ड को मामले की जांच करने का आदेश दिया। बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे काल्पनिक करार देते हुए फिल्म को मंजूरी दे दी। अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नए आरोपों ने भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक तनाव को सिनेमा से जोड़ते हुए फिल्म को एक और अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है। यह विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच की बहस को फिर से ताजा करता है और यह दिखाता है कि फिल्मों का प्रभाव सीमा पार कितना गहरा हो सकता है।
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