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Bihar Election 2025: वो 29 सीटें जिसने 2005 में लालू का 15 साल का राज खत्म कर दिया था, क्या अब चिराग की LJP इतिहास दोहराएगी?

भारत बिहार राजनीति
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Photo Credit- X

बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधनों और चालबाजियों से भरी पड़ी रही है। यहां छोटी पार्टियां कई बार बड़ी ताकतों को रास्ता दिखा देती हैं। राम विलास पासवान ने 2005 में यही किया था, जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव के लंबे राज को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। अब उनके बेटे चिराग पासवान उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की भूमिका बड़ी हो सकती है। वे एनडीए को समर्थन देने के लिए सख्त शर्तें रख रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या चिराग अपने पिता की तरह सत्ता की कुंजी संभाल पाएंगे।

2005 का वो ऐतिहासिक मोड़

1990 से लालू प्रसाद यादव बिहार पर काबिज थे। उन्होंने मुस्लिम-यादव गठजोड़ बनाकर पिछड़ी जातियों को एकजुट किया था। लेकिन चारा घोटाला और जंगलराज की बदनामी ने उनकी सरकार को कमजोर कर दिया। 2005 के फरवरी चुनाव में किसी को बहुमत न मिला। एनडीए को 88 सीटें, आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को 56 और राम विलास की एलजेपी को 29 सीटें मिलीं। राम विलास दलितों के बड़े नेता थे और उनके पास किंगमेकर बनने का पूरा मौका था। उन्होंने लालू को समर्थन देने से साफ मना कर दिया। शर्त रखी कि मुस्लिम मुख्यमंत्री बने या सरकार न बने। लालू ने अब्दुल गफ्फार का नाम आगे किया लेकिन राम विलास ने ठुकरा दिया। विधानसभा भंग हो गई। अक्टूबर 2005 में नए चुनाव हुए। इस बार एनडीए ने 143 सीटें जीत लीं। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। एलजेपी को सिर्फ 10 सीटें मिलीं लेकिन लालू का 15 साल का राज खत्म हो गया।

चिराग का राजनीतिक सफर

चिराग पासवान ने बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखा। 2014 में जमुई से पहली बार सांसद बने। 2019 में फिर जीते। अक्टूबर 2020 में पिता राम विलास के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली। लेकिन परिवार में दरार आ गई। चाचा पशुपति कुमार पारस ने बगावत कर ली। पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई। चिराग ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) बनाई, जो पासवान समुदाय के 5.3 प्रतिशत वोटों पर टिकी हुई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग ने एनडीए से नाता तोड़ा लेकिन बीजेपी से दोस्ती दिखाई। उन्होंने जेडीयू को निशाना बनाया। 137 सीटों पर लड़े लेकिन सिर्फ एक जीती। लेकिन जेडीयू को 34 सीटों पर भारी नुकसान पहुंचाया। एनडीए जीता लेकिन नीतीश तीसरे नंबर पर खिसक गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग ने पांच में से पांच सीटें जीत लीं। यह उनकी बढ़ती ताकत का सबूत था।

2025 चुनाव की तैयारी और शर्तें

नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए चिराग पूरी तरह तैयार हैं। 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी। 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। जून 2025 में आरा की रैली में उन्होंने कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे लेकिन सीटें जनता चुनेगी। वे सामान्य सीट से लड़ना चाहते हैं, ताकि दलित वोटबैंक से बाहर निकल सकें। एनडीए से 40-50 सीटें मांग रहे हैं। बीजेपी 20-25 देने को तैयार है। ब्रह्मपुर और गोविंदगंज पर विवाद चल रहा है। चिराग कहते हैं कि उनकी मांग सीटों की संख्या पर नहीं, बल्कि बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट पर है। अगर एनडीए कमजोर पड़ा तो चिराग के 20-25 विधायक किंगमेकर बन सकते हैं। नीतीश की उम्र और सेहत को देखते हुए बीजेपी चिराग को मुख्यमंत्री का चेहरा बना सकती है। लेकिन जन सुराज से गठबंधन की अफवाहें भी हैं, जो अभी पक्की नहीं हुईं।

किंगमेकर की भूमिका में चिराग

राम विलास ने 2005 में साबित किया था कि छोटी पार्टी बड़ा खेल बदल सकती है। चिराग उसी रणनीति पर चल रहे हैं। वे वोट बैंक से एनडीए को मजबूत करेंगे लेकिन अपनी शर्तों पर। अगर 20-30 सीटें जीत लीं तो किंगमेकर बन जाएंगे। लेकिन अगर दांव उल्टा पड़ा तो वोट काटने वाले का ठप्पा लग सकता है। बिहार के मतदाता विकास और नौकरियों पर फैसला करेंगे। चिराग की महत्वाकांक्षा बिहार की सियासत को नया मोड़ देगी।

KeywordsChirag Paswan politics, Bihar assembly elections 2025, LJP, RJD, NDA, Lalu Yadav, Ramvilas Paswan

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