- Advertisement -
- Advertisement -

‘धर्म बदलने के बाद नहीं मिलेगा SC\ST का दर्जा’, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

भारत
historic supreme court verdict now adoptive mothers will also get 12 weeks of maternity leave

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति यानि SC का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों को ही मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म, जैसे ईसाई धर्म अपनाता है और उसका पालन करता है, तो वह इस श्रेणी के लाभ का हकदार नहीं रहेगा। जस्टिस पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारी की पीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों का लाभ नहीं ले सकेगा। कोर्ट ने साफ किया कि दूसरे धर्म को अपनाने पर अनुसूचित जाति की मान्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।

धर्म परिवर्तन पर SC/ST दर्जे को लेकर स्पष्टता

सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा और वह SC/ST एक्ट, 1989 के तहत मिलने वाले संरक्षण का लाभ नहीं ले सकेगा। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस ए.वी. अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि जो व्यक्ति ईसाई धर्म को पूरी तरह अपनाकर उसका पालन करता है, वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आता। यह फैसला मई 2025 के एक मामले में दायर अपील पर सुनाया गया।

केस की पूरी कहानी, FIR से सुप्रीम कोर्ट तक

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब पादरी चिंथदा आनंद ने कुछ लोगों पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए SC/ST कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने FIR भी दर्ज कर ली, लेकिन आरोपियों में शामिल अक्काला रामिरेड्डी ने इस केस को रद्द करने के लिए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आनंद ईसाई धर्म अपना चुके हैं, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिल सकता और इसी आधार पर FIR को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जाति प्रमाण पत्र होने से उनका दावा मजबूत नहीं होता। इसके बाद आनंद ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां अंतिम निर्णय दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन पर SC दर्जे को लेकर दी स्पष्ट व्याख्या

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति की मान्यता केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म तक सीमित है। यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धर्म बदलने के बाद इस श्रेणी से जुड़े अधिकार और लाभ भी नहीं मिलेंगे।

लंबे समय तक धर्म पालन को आधार बनाकर कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार अपीलकर्ता कई वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था और पादरी के रूप में धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय था। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता और ऐसे में SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत संरक्षण देना उचित नहीं है।

Keywords: Supreme Court SC Status Conversion, SC Status After Religious Conversion India, SC ST Act 1989 Supreme Court Ruling, Andhra Pradesh High Court SC Conversion Case

What do you think?

- Advertisement -