पंजाबी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक राजवीर जवादां का बुधवार (8 अक्टूबर) को निधन हो गया। वे पिछले 11 दिनों से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे थे। 27 सितंबर को हिमाचल प्रदेश के बद्दी के पास हुए एक बड़े सड़क हादसे में उन्हें गंभीर सिर और रीढ़ की हड्डी की चोटें आई थीं। हादसा उस समय हुआ जब वे शिमला की ओर अपने बाइक से जा रहे थे और संतुलन बिगड़ने से वाहन फिसल गया। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिसके बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।
मनोरंजन जगत में मचा शोक
राजवीर की हालत को लेकर पंजाबी फिल्म और संगीत जगत में गहरा दुख था। दिलजीत दोसांझ, गिप्पी ग्रेवाल, एमी विर्क, नेहरू बाजवा और कंवर ग्रेवाल जैसे कलाकारों ने सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। यहां तक कि दिलजीत दोसांझ ने अपने हांगकांग कॉन्सर्ट के दौरान स्टेज पर दर्शकों से सामूहिक रूप से दुआ करने की अपील की थी और कहा था, “दुआ में असर है।” राजवीर की मां ने बताया कि इस मुश्किल वक्त में कई कलाकारों और दोस्तों ने परिवार की मदद के लिए आगे बढ़कर चिकित्सकीय खर्चों में सहयोग किया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और 11 दिनों बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
‘तु दिस पैंदा’ से मिली पहचान, फिल्मों में भी किया अभिनय
पंजाब में जन्मे राजवीर जवादां ने अपने संगीत करियर की शुरुआत छोटे स्तर से की थी, लेकिन उनके गाने जल्दी ही दर्शकों के दिलों तक पहुंच गए। ‘तु दिस पैंदा’, ‘सरदारी’, ‘सरनेम’, ‘अफरीन’, ‘लैंडलॉर्ड’, ‘डाउन टू अर्थ’ और ‘कंगनी’ जैसे गानों ने उन्हें पंजाबी संगीत जगत का जाना-माना चेहरा बना दिया। राजवीर ने न सिर्फ गायक के रूप में बल्कि अभिनेता के तौर पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने ‘सुबेदार जोगिंदर सिंह’ (2018), ‘जिंद जां’ (2019) और ‘मिंदो तसीलदारनी’ (2019) जैसी फिल्मों में काम किया था, जहां उनके अभिनय को सराहा गया।
परिवार में पसरा मातम
राजवीर जवादां अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके निधन ने न केवल संगीत प्रेमियों को, बल्कि पूरे पंजाब को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक भावनात्मक पोस्ट कर रहे हैं और कई कलाकारों ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। राजवीर के गीतों में पंजाब की मिट्टी की खुशबू, सादगी और अपनापन झलकता था। वे उन कलाकारों में से थे जिन्होंने लोक संस्कृति और आधुनिक संगीत के बीच एक सेतु का काम किया। उनका अचानक यूं चले जाना पंजाबी संगीत उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसे भरना मुश्किल होगा।
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