पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरती नजर आ रही है। दरअसल, कुछ खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया है। हालांकि उन्होंने इसके अलग-अलग कारण बताए हैं, लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, PSL पर आतंकी खतरा मंडरा रहा है। सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक गुट जमात-उल-अहरार ने विदेशी खिलाड़ियों को सीधे धमकी दी है कि अगर वे खेलने आते हैं, तो किसी भी घटना की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी।
यह धमकी जमात-उल-अहरार के एक बड़े कमांडर के हवाले से दी गई है। टीटीपी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर विदेशी खिलाड़ियों से टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने की अपील की है। ‘द संडे गार्डियन’ को दिए इंटरव्यू में संगठन ने अपनी चेतावनी दोहराते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्डों के लिए गंभीर सलाह बताया है।
संगठन के एक कमांडर ने कहा कि सभी संबंधित क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें पाकिस्तान भेजने से बचें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी तरह की घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी, क्योंकि वे पहले ही चेतावनी दे चुके हैं।
वहीं, टीटीपी के प्रवक्ता असद मंसूर ने एक पोस्ट में कहा कि आज पाकिस्तान के लोग, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के निवासी, सैन्य दमन और राज्य-प्रायोजित हिंसा के कारण अभूतपूर्व कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सड़कों पर लोगों के जनाजे उठ रहे हैं और माताएं अपने बेटों के गायब होने का शोक मना रही हैं। ऐसे हालात में पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) का आयोजन उनके दुखों का मजाक उड़ाने जैसा है।
उन्होंने आगे कहा कि पूरे क्षेत्र में हिंसा के बीच इस तरह के आयोजन करना जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिसे वे पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं। साथ ही उन्होंने PSL में शामिल सभी प्रतिभागियों, खासकर विदेशी खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि देश की मौजूदा सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति बेहद अस्थिर है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती।
उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और तुरंत टूर्नामेंट से हट जाएं, क्योंकि मौजूदा माहौल किसी भी शांतिपूर्ण खेल आयोजन के लिए उपयुक्त नहीं है।
असद मंसूर ने यह भी कहा कि वे खेल गतिविधियों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन देश के एक हिस्से में क्रिकेट के जरिए ‘सामान्य स्थिति’ दिखाना, जबकि दूसरे हिस्से में हिंसा जारी है, यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम की चमक-दमक के पीछे लोगों के दर्द को छिपाया नहीं जा सकता और न ही वे अपने लोगों की गरिमा से समझौता होने देंगे।
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