कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित ‘आतंकवादी’ वाले बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी ने इस टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में बीजेपी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा। इस दल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, अर्जुन राम मेघवाल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
बीजेपी का चुनाव आयोग में कड़ा विरोध
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह गंभीर लोकतांत्रिक मुद्दा है। पीएम को आतंकवादी कहना गलत और आपत्तिजनक है। रिजिजू के अनुसार, किसी भी दल ने पहले इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है।
किरन रिजिजू ने कहा कि चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अगर कोई भी राजनीतिक दल इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है, तो इसे केवल पार्टी या सरकार का मुद्दा न माना जाए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ गंभीर और निंदनीय कार्य है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी और नेतृत्व देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। उन्होंने बताया कि आयोग ने उनकी बात ध्यान से सुनी और उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है। रिजिजू ने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पूरा विश्वास है और वे निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे।
खरगे का गठबंधन पर बयान
मल्लिकार्जुन खरगे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर AIADMK और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल उठा रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जो पार्टी अन्नादुरै की तस्वीर का इस्तेमाल करती है, वह कैसे प्रधानमंत्री मोदी के साथ जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और उनकी पार्टी समानता और न्याय के सिद्धांतों में विश्वास नहीं रखते। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा गठबंधन लोकतंत्र और अन्नादुरै, कामराज, पेरियार, कलैगनार और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों के खिलाफ है।
खरगे ने बयान पर दी सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब खरगे से उनके बयान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका मतलब यह नहीं था कि प्रधानमंत्री मोदी आतंकवादी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा केवल इस बात की ओर था कि पीएम मोदी लोगों और राजनीतिक दलों पर दबाव बनाते हैं और उन्हें डराते हैं। खरगे ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, आयकर और सीबीआई जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल भी इसी तरह किया जा रहा है और उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया है।
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