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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने की ओछी हरकत, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला पत्रकार को मारी आंख

दुनिया भारत
pakistani army spokesperson caught making inappropriate move eyes wink at female journalist during press conference

Photo Credit - X

पाकिस्तान की सेना युद्ध के अलावा कई हर तरह के गलत कामों में भी शामिल होती है, जैसे राजनीति में दखल देना, मानवाधिकार उल्लंघन करना और प्रेस पर दबाव बनाना। लेकिन हाल ही में जो वीडियो सामने आया है, उसने सेना की छवि को और नुकसान पहुंचाया है। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, ISPR के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने महिला पत्रकार अबसा कोमन के सवाल का जवाब देते हुए न सिर्फ व्यंग्य किया, बल्कि कैमरे के सामने आंख भी मारी, जिससे एक नई बहस छिड़ गई। यह घटना उस समय हुई जब महिला पत्रकार गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल कर रही थीं।

इमरान खान पर पूछे गए सवाल पर बदला लहजा

पत्रकार ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर लगाए गए आरोप जैसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा”, “विदेशी इशारों पर काम”, और “देश-विरोधी गतिविधियों” पर सवाल पूछा। इसके जवाब में अहमद चौधरी ने न सिर्फ इन आरोपों को दोहराया बल्कि तीसरे आरोप के बाद चौथा आरोप जोड़ते हुए कहा, “और एक चौथा प्वाइंट भी जोड़ें, वह जहनी मरीज हैं।” वैसे तो यह बयान खुद ही विवादित था, मगर उसके बाद DG ISPR का मुस्कुराकर महिला पत्रकार को आंख मारना और भी ज्यादा आपत्तिजनक माना गया। पाकिस्तान में मीडिया और सेना के रिश्तों की संवेदनशीलता को समझते हुए यह व्यवहार बेहद गैर-पेशेवर माना जा रहा है।

सेना की चिंता या राजनीतिक एजेंडा?

अपने जवाबों में जनरल चौधरी सिर्फ इमरान खान पर आरोप लगाने तक नहीं रुके। उन्होंने 9 मई 2023 को सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों को एक बार फिर सीधे-सीधे इमरान खान से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जेल में खान से मिलने आने वाले लोगों का इस्तेमाल सेना के खिलाफ “जहर फैलाने” के लिए किया जा रहा है। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान में लंबे समय से यह आरोप लगाया जाता रहा है कि सेना राजनीतिक मामलों में अत्यधिक दखल देती है। DG ISPR का यह बयान उसी धारणा को और मजबूत करता है कि इमरान खान और सेना के बीच टकराव अब व्यक्तिगत स्तर पर भी उतर आया है।

सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की जनता और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने फिर से सेना की आलोचना की है। कई लोग कह रहे हैं कि यह हरकत दिखाती है कि पाकिस्तानी सेना को संस्थागत मर्यादा की कोई परवाह नहीं है। एक यूजर ने लिखा की, “यह सब कैमरे के सामने हो रहा है। ऐसे देश में लोकतंत्र कैसे बचेगा?” वहीं दूसरे ने पाकिस्तान की स्थिति पर तंज कसते हुए लिखा, “A country that has become a meme.” महिला पत्रकारों के प्रति इस रवैये पर महिला अधिकार समूहों ने भी सवाल उठाए हैं, और कुछ पत्रकारों ने इसे प्रेस की गरिमा पर हमला बताया है।

पाकिस्तानी सेना की छवि पर उठा गहरा सवाल

यह घटना सिर्फ एक “आंख मारने” की नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की सेना की मानसिकता को उजागर करती है। यह सेना की शक्तिशाली स्थिति में बैठे अधिकारियों की सोच को दर्शाता है, जो लोकतंत्र, मीडिया स्वतंत्रता और महिला सम्मान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पहले ही अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। DG ISPR का यह व्यवहार केवल दबाव को बढ़ाता है और यह भी साबित करता है कि सेना के अधिकारी सार्वजनिक मंचों पर भी संस्थागत गरिमा का पालन करने में रूचि नहीं रखते।

यह वीडियो पाकिस्तान की राजनीति और सेना की भूमिका पर चल रही बहस को और तेज कर चुका है। अब यह देखना बाकी है कि क्या इस मामले पर कोई ठोस जवाबदेही तय की जाएगी या यह भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ दबकर रह जाएगा।

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