नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के ‘पाकिस्तान के साथ बातचीत’ को लेकर दिए गए हालिया बयान पर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है। होसबोले ने सुझाव दिया था कि कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं करने चाहिए। इस बयान पर अब संघ प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत का बड़ा रिएक्शन सामने आया है, जिन्होंने इस मुद्दे पर RSS का आधिकारिक और कड़ा रुख साफ कर दिया है।
मोहन भागवत ने क्या कहा?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने होसबोले के बयान को सही परिप्रेक्ष्य में रखते हुए स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति के रास्ते खुले रखने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भारत अपनी सुरक्षा या आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता करेगा।
भागवत ने टू-टूक लहजे में कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बेहतर करना भारत की संस्कृति रही है, लेकिन ‘आतंकवाद और बातचीत दोनों एक साथ नहीं चल सकते।’ जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना और भारत विरोधी गतिविधियां बंद नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की सार्थक बातचीत संभव नहीं है।
क्या था दत्तात्रेय होसबोले का बयान?
दरअसल, कुछ समय पहले दत्तात्रेय होसबोले ने भू-राजनीतिक (Geo-political) परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा था कि एक मजबूत राष्ट्र को अपने पड़ोसियों के साथ कूटनीतिक चैनल हमेशा बनाए रखने चाहिए। उनका मानना था कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह से बंद कर देने से भविष्य के कूटनीतिक विकल्पों पर असर पड़ता है। उनके इस बयान को कई लोगों ने पाकिस्तान के प्रति RSS के रुख में नरमी के तौर पर देखना शुरू कर दिया था।
संघ ने साफ की तस्वीर
भागवत के इस स्पष्टीकरण ने उन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि पाकिस्तान को लेकर संघ की लाइन बदल रही है। RSS ने साफ कर दिया है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। होसबोले का बयान कूटनीतिक थ्योरी का हिस्सा था, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि पाकिस्तान जब तक अपनी धरती पर पल रहे आतंकियों पर कड़ा एक्शन नहीं लेता, तब तक भारत की तरफ से कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संघ (RSS) भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अपनी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर पूरी तरह से अडिग है।
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