- Advertisement -
- Advertisement -

जिस समय दुनिया अंधेरे में थी, तब भारत में वेदों का ज्ञान कैसे गूंज रहा था?

भारत शिक्षा
how the knowledge of the vedas was resonating in india when the world was in darkness

भारतीय सभ्यता की पहचान हमेशा से ज्ञान की खोज और साधना रही है, जहाँ ज्ञान को केवल किताबों से हासिल करने की चीज़ नहीं माना गया है, बल्कि यह आत्मा को जानने और समझने का एक गहरा तरीका रहा है। यह बात हमें हैरान करती है कि जब दुनिया का ज़्यादातर हिस्सा ठीक से पढ़ना-लिखना भी नहीं जानता था और अज्ञान के अँधेरे में डूबा हुआ था, ठीक उसी समय भारत की धरती पर ‘वेद’ लिखे जा रहे थे, जिनमें दुनिया का सारा ज्ञान छिपा है। इस ज्ञान की खोज ने पूरी दुनिया को ‘शून्य’, भाषा विज्ञान, ‘योग’ और ‘गणित’ जैसे कई बहुत ही खास और अनमोल योगदान दिए, जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा बदल दी।

शून्य की खोज और उसकी पूरी दुनिया पर देन

भारत ने पूरी दुनिया को ‘शून्य’ की जो अमूल्य देन दी है, उसका मतलब केवल एक अंक या नंबर नहीं है, बल्कि इस ‘कुछ नहीं’ में तो ‘सब कुछ’ का गहरा ज्ञान छिपा हुआ है। संस्कृत भाषा में ‘शून्य’ शब्द का मतलब ‘खाली’ या ‘रिक्त’ होता है, लेकिन सोचने और समझने के नज़रिए से यह अनंत संभावनाओं को दिखाता है। भारतीय विचारकों ने शून्य को एक ऐसी शक्ति माना, जिसमें किसी चीज़ को घटाना या उसमें कुछ जोड़ना, सब मुमकिन था, ठीक वैसे ही जैसे इस पूरे ब्रह्मांड को चलाने वाला ‘ब्रह्म’ होता है। आज के समय में हम जो भी कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं, या अंतरिक्ष में जो भी गणनाएँ करते हैं, उन सभी का आधार इसी महान खोज ‘शून्य’ में छिपा हुआ है।

भाषा, योग और विज्ञान को जोड़ने वाले सिद्धांत

भारत के एक बहुत बड़े विद्वान ‘पाणिनि’ ने ‘अष्टाध्यायी’ नाम का एक महान ग्रंथ लिखा, जो केवल हिंदी या संस्कृत व्याकरण की किताब नहीं थी, बल्कि यह तर्कशास्त्र और गणित के नियमों का एक ऐसा अद्भुत मेल थी। इस ग्रंथ के नियम इतने मज़बूत और सटीक थे कि आज की आधुनिक कंप्यूटर भाषा और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के कई बड़े सिद्धांत भी इसी किताब से प्रेरणा लेते हैं। इसी तरह भारत ने हमें ‘चेतना’ यानी मन को समझने का विज्ञान भी दिया, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण महर्षि ‘पतंजलि’ का ‘योग सूत्र’ है। ‘योग’ केवल शरीर को मोड़ने वाला आसन नहीं है, बल्कि यह दिमाग को एक जगह पर लगाने और चेतना को शुद्ध करने का एक सबसे अच्छा तरीका है। ‘योग’ की यह परंपरा हमारे दिमाग के काम करने के तरीकों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सिद्धांतों को अपने अंदर समाए हुए है।

गणित, ज्योतिष और चिकित्सा विज्ञान में बड़ा योगदान

महान गणितज्ञ और ज्योतिषी ‘आर्यभट’ ने कई हज़ार साल पहले ही यह सिद्धांत दे दिया था कि हमारी पृथ्वी गोल है, वह अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। इसके अलावा, दूसरे बड़े विद्वान ‘भास्कराचार्य’ ने अपनी किताबें ‘लीलावती’ और ‘बीजगणित’ में गणित के नियमों को और आगे बढ़ाया, जिसने आधुनिक गणित की नींव रखने में मदद की। विज्ञान की बात करें तो भारत ने चिकित्सा-विज्ञान को भी एक नई दिशा दी। ‘चरक’, ‘सुश्रुत’ और ‘वाग्भट’ जैसे बड़े वैद्यों ने ‘आयुर्वेद’ का ज्ञान दिया, जो इंसानी शरीर और प्रकृति के बीच सही संतुलन बनाने पर जोर देता है। ‘सुश्रुत’ को तो सर्जरी यानी शल्य-चिकित्सा का पिता कहा जाता है, जबकि ‘चरक संहिता’ में रोग को सही से पहचानना, सही खान-पान और दिमाग को शांत रखने पर खास ज़ोर दिया गया है।

भारतीय ज्ञान की हमेशा रहने वाली इंसानियत की सोच

भारतीय ज्ञान की हमेशा से यह खासियत रही है कि वह हर चीज़ को इंसान और प्रकृति के मेल-मिलाप से देखता है। इसलिए हमारी वैज्ञानिक सोच हमेशा सही रास्ते पर चलने वाली और इंसानियत वाली रही है। ‘महर्षि कपिल’, ‘पतंजलि’, ‘कणाद’, ‘गौतम’ और दूसरे बड़े विद्वानों ने ‘सांख्य’, ‘योग’, ‘वैशेषिक’, ‘न्याय’, ‘मीमांसा’ और ‘वेदांत’ जैसे अलग-अलग दर्शन दिए हैं, जिनसे हमें ज्ञान के अलग-अलग पहलू जानने को मिलते हैं। आज दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय भी भारत के ‘वेदांत’, ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ में बताए गए वैज्ञानिक तथ्यों पर रिसर्च कर रहे हैं, जो यह साफ बताता है कि भारतीय ज्ञान आज के समय में भी बहुत ज़रूरी और प्रासंगिक है।

Keywords: Indian Wisdom, Vedas Knowledge, Zero Contribution, Yoga Science, Mathematics History

What do you think?

- Advertisement -