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पुष्पा 2 से RCB विजय परेड तक, अब विजय रैली में भगदड़, 35 मौतों के बावजूद क्यों नहीं सीखा गया सबक?

भारत
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तमिलनाडु के करुर जिले में अभिनेता और राजनेता विजय की पार्टी टीम विजय कझगम (TVK) की ओर से आयोजित रैली में शनिवार को भयावह भगदड़ मच गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक 39 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना उस समय हुई जब विजय मंच से भीड़ को संबोधित कर रहे थे। बढ़ती संख्या ने सुरक्षा इंतजामों को ध्वस्त कर दिया। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और बच्चों तथा बुजुर्गों की हालत बिगड़ने लगी। यह घटना न सिर्फ दुखद है बल्कि सवाल खड़ा करती है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के बुनियादी नियम आखिर क्यों बार-बार दरकिनार कर दिए जाते हैं।

मुख्यमंत्री स्टालिन की प्रतिक्रिया और जांच आदेश

राज्य के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच के आदेश दिए। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव कार्य तेज करने को कहा। साथ ही यह भी घोषणा की कि वे खुद करुर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे। सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, हर बार मुआवजा देने और जांच बैठाने से ही समस्या हल नहीं होगी। जब तक आयोजक और प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम नहीं उठाते, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

करुर की यह घटना पहली नहीं है। कुछ ही समय पहले अभिनेता अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ की स्क्रीनिंग के दौरान भी भगदड़ मच गई थी, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए थे। थिएटर प्रबंधन और सुरक्षा टीम पर लापरवाही का आरोप लगा और मामला कोर्ट तक पहुंचा। इसके अलावा, 2024 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की जीत के जश्न के दौरान बेंगलुरु की सड़कों पर भीड़ बेकाबू हो गई थी। आयोजकों ने जहां 10 हजार लोगों के आने का अनुमान लगाया था, वहां 50 हजार से ज्यादा लोग जुट गए। नतीजतन भगदड़ में कई लोग घायल हुए और मामला आयोजकों तथा क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ दर्ज हुआ। यह घटनाएं साफ दिखाती हैं कि भीड़ नियंत्रण के बुनियादी सिद्धांतों की लगातार अनदेखी हो रही है।

सबक लेने की जरूरत, वरना इतिहास दोहराएगा खुद को

इन घटनाओं की सबसे बड़ी समानता है, लापरवाह तैयारी और सुरक्षा इंतजामों की कमी। चाहे राजनीतिक रैली हो, फिल्म की स्क्रीनिंग या क्रिकेट का जश्न, आयोजक अक्सर लोकप्रियता के अनुमान को हल्के में ले लेते हैं। नतीजा यह होता है कि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है और भीड़ का दबाव लोगों की जान पर भारी पड़ता है। अब वक्त आ गया है कि सरकार, प्रशासन और आयोजक मिलकर भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दें। तय संख्या से ज्यादा लोगों को प्रवेश न देना, पर्याप्त मेडिकल और सुरक्षा स्टाफ तैनात करना, और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को मजबूत करना अनिवार्य बनाया जाए। तभी ऐसी त्रासदियों से बचा जा सकेगा, वरना करुर जैसे हादसे सिर्फ आंकड़ों में जुड़ते रहेंगे और हर बार मासूम जानें जाती रहेंगी।

Keywords Karur Stampede, Vijay Rally Tragedy, Tvk Rally Accident, Mk Stalin Response, Crowd Management Failure, Pushpa 2 Stampede, Rcb Victory Parade Stampede, Public Safety India, Crowd Control Negligence

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