तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने अपनी रणनीति पर पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा और AIADMK के बीच गठबंधन का ऐलान तो हो चुका है, लेकिन उसके बाद से दोनों पार्टियों के नेता लगातार मीटिंग्स कर रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले AIADMK महासचिव एडप्पाडी के पलनीस्वामी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले। ये मुलाकात चुनावी तालमेल के लिहाज से काफी अहम मानी गई। उसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नयनार नागेन्द्रन ने चेन्नई में पलनीस्वामी से मिलकर दिल्ली वाली बातचीत को आगे बढ़ाया। अंदर की बात ये है कि इस मीटिंग में गठबंधन की रूपरेखा, साझा रणनीति और सबसे ज्यादा सीट शेयरिंग पर ही लंबी चर्चा चली।
अब असली पेंच सीट शेयरिंग में फंसा है।
गठबंधन में सबसे बड़ा झगड़ा सीटों के बंटवारे को लेकर है। भाजपा इस बार तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, इसलिए 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की जिद पर अड़ी है। 23 दिसंबर को चेन्नई में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में भी भाजपा ने यही मांग रखी थी। दिल्ली में अमित शाह से बात करते वक्त भी भाजपा अपने स्टैंड से टस से मस नहीं हुई। दूसरी तरफ, AIADMK चाहती है कि वह खुद कम से कम 170 सीटों पर लड़े। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं, तो AIADMK बाकी सभी सहयोगी दलों, जिनमें भाजपा भी शामिल है, के लिए सिर्फ 64 सीटें छोड़ने के मूड में है। सीटों का यही फर्क दोनों के बीच सबसे बड़ा कांटा बन गया है।
सिर्फ सीटें ही नहीं, साथी दलों को लेकर भी खींचतान जारी है।
गठबंधन में कौन-कौन शामिल हो, इस पर भी भाजपा और AIADMK में सहमति नहीं बन पा रही है। भाजपा चाहती है कि ओ. पन्नीरसेल्वम और TTV दिनाकरन की पार्टी AMMK को भी जोड़ लिया जाए, ताकि वोटों का बिखराव रोका जा सके। लेकिन AIADMK इस पर साफ मना कर चुकी है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक पलनीस्वामी ने दो टूक कह दिया है कि ओ. पन्नीरसेल्वम की वापसी का कोई सवाल ही नहीं। AMMK को लेकर भी AIADMK फिलहाल कोई फैसला लेने के मूड में नहीं है, बात टाल दी गई है। इससे साफ है, गठबंधन सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि असलियत में भी कई उलझनों से गुजर रहा है।
पीएम मोदी की रैलियों पर हुई चर्चा
बैठकों में पीएम मोदी के चुनावी दौरों पर भी बात हुई। दोनों पार्टियां चाहती हैं कि पीएम उन्हीं इलाकों में जाएं, जहां गठबंधन को सीधा फायदा मिले। वैसे, पिछली बार का अनुभव भाजपा के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा। 2021 के चुनाव में AIADMK ने भाजपा को 25 सीटें दी थीं, लेकिन भाजपा बस 4 सीटें ही जीत पाई। अब भाजपा उससे भी ज्यादा सीटें मांग रही है, तो जाहिर है गठबंधन के रिश्ते पर सवाल उठ रहे हैं। आगे देखना यही है कि दोनों दल कोई बीच का रास्ता निकाल लेते हैं या फिर ये रस्साकशी गठबंधन के भविष्य को खतरे में डाल देगी।
Keywords: Tamil Nadu Assembly Election, BJP AIADMK Alliance, Edappadi Palaniswami, Amit Shah, Nainar Nagendran, BJP Tamil Nadu