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‘लैंड फॉर जॉब’ केस में लालू यादव को बड़ा झटका, FIR रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

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लालू प्रसाद यादव को ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने CBI की एफआईआर को रद्द करने की मांग ठुकरा दी और साफ किया कि इस केस की सुनवाई अब ट्रायल कोर्ट में फैक्ट्स के आधार पर आगे बढ़ेगी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान लालू यादव की निचली अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी नहीं होगी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को पूरे मामले की मेरिट पर जांच और निर्णय लेने की पूरी छूट दी गई है।

याचिका में क्या थी मांग

लालू प्रसाद यादव ने ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में अदालत से गुहार लगाई थी कि उनके और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी जांच कार्रवाई को रद्द कर दिया जाए। उनका पक्ष था कि यह मामला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत है। हालांकि, इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट इस मांग को खारिज कर चुका था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि जांच एजेंसियों ने इस मामले में तय नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है, इसलिए एफआईआर को रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला

‘लैंड फॉर जॉब’ केस की जड़ें उस दौर से जुड़ी हैं जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की भर्तियों में अनियमितताएं हुईं और कुछ लोगों को नौकरी देने के बदले उनकी जमीनें ली गईं। इस मामले में जांच एजेंसी CBI का कहना है कि नियुक्तियों में नियमों को दरकिनार किया गया। वहीं, अदालत में लालू यादव की ओर से यह दलील दी गई थी कि केस चलाने से पहले जरूरी कानूनी मंजूरी (सैंक्शन) नहीं ली गई। इस केस में राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव के नाम भी शामिल हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और भी चर्चित हो गया है।

क्या थे आरोप

‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप ‘डी’ की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनमें बड़ी संख्या उन इलाकों से जुड़ी थी, जो उनके परिवार के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते हैं। इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2023 में दावा किया था कि पूरे मामले में करीब 600 करोड़ रुपये के लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया लेनदेन था, जिसमें नौकरी के बदले संपत्ति हासिल की गई।

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