- Advertisement -
- Advertisement -

क्या प्रसाद हमेशा वेज होता है? जानिए भारत के इन मंदिरों के चौंकाने वाले और अनोखे प्रसाद की कहानियां!

धर्म
discover unique and surprising prasads from indian temples

भारत में मंदिरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। मंदिर केवल भक्ति और पूजा का स्थान नहीं होते, बल्कि यहां मिलने वाला प्रसाद भी अपनी खास पहचान रखता है। जब हम प्रसाद की बात करते हैं, तो आमतौर पर हमारे दिमाग में फल, लड्डू या मिठाइयां ही आती हैं। इसके अलावा कई मंदिरों में सात्विक भोजन जैसे दाल-चावल, खिचड़ी आदि प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद में भक्तों को मटन चावल, मटन बिरयानी, नूडल्स, और मोमो जैसे अनोखे व्यंजन भी मिलते हैं? ये मंदिर अपने खास और अलग तरह के प्रसाद के लिए प्रसिद्ध हैं। इस आर्टिकल में हम आपको भारत के उन्हीं मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां प्रसाद की ये अनोखी परंपरा श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव देती है। जानते हैं ऐसे कुछ मंदिरों के बारे में, जहां प्रसाद की ये रंगीन और स्वादिष्ट विविधताएं देखने को मिलती हैं।

1) चाइनीज काली मंदिर – पश्चिम बंगाल

अनोखे प्रसाद वाले मंदिर में सबसे पहले नाम आता है कोलकाता के चाइना टाउन में स्थित ‘चाइनीज काली मंदिर’ का। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रसाद है, जो पूरे भारत में अनोखा माना जाता है। यहां देवी काली को चाउमीन, मंचूरियन, फ्राइड राइस और सब्जियों का भोग लगाया जाता है, जो बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह प्रसाद पूरी तरह से शाकाहारी होता है क्योंकि मंदिर में नॉन-वेज मना है। अब जितनी मजेदार यहां की प्रसाद है उससे भी ज्यादा उसके पीछे की कहानी है। बताया जाता है कि एक चीनी परिवार के बच्चे की तबियत बहुत खराब थी, लेकिन जब उन्होंने देवी काली से मन से प्रार्थना की, तो बच्चा चमत्कारिक रूप से ठीक हो गया। इसके बाद स्थानीय बंगाली और चीनी लोगों ने मिलकर इस मंदिर का निर्माण किया। आपको बता दें, यह मंदिर करीब पचास साल पुराना है।

2) रजरप्पा मंदिर – झारखंड

झारखंड के रामगढ़ जिले में रजरप्पा मंदिर (राजरप्पा धाम) मां छिन्नमस्तिका देवी को समर्पित एक बहुत पुराना और प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भैरवी और दामोदर नदियों के मिलन स्थल पर बना है, जो बहुत पवित्र माना जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां मां को मांस का भोग लगाया जाता है, जिसे “मटन प्रसाद” के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु बकरे की बलि देकर देवी को खुश करते हैं और मानते हैं कि इससे उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर में बलि देने का तरीका और जगह पुजारियों की देखरेख में तय होती है। यह परंपरा शक्ति पूजा और तंत्र साधना से जुड़ी है और बहुत पुरानी है। नवरात्रि जैसे खास दिनों पर हजारों लोग दूर-दूर से यहां आते हैं, मटन प्रसाद चढ़ाने और प्राप्त करने। रजरप्पा मंदिर झारखंड की धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

3) जिंदा मछली का प्रसाद – तेलंगाना

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक बहुत ही अनोखी परंपरा है, जिसे “जिंदा मछली का प्रसाद” कहा जाता है। यह परंपरा हर साल जून महीने में फिश प्रसादम उत्सव के दौरान मनाई जाती है। यह आयोजन बथेनी गोसाई परिवार करीब 170 सालों से करता आ रहा है। इस परंपरा में, जो लोग अस्थमा या सांस की बीमारी से परेशान होते हैं, वे एक छोटी जिंदी मछली (मुरेल फिश) निगलते हैं। इस मछली के शरीर में हल्दी और जड़ी-बूटियों का पेस्ट भरा होता है। माना जाता है कि यह मछली और दवा उनके गले और फेफड़ों में जाकर बलगम साफ करती है और सांस लेने में मदद करती है। हर साल लाखों लोग देश के अलग-अलग हिस्सों से हैदराबाद आते हैं ताकि यह दवा ले सकें। यह कार्यक्रम नंपल्ली के एक्सहिबिशन ग्राउंड में होता है और प्रशासन की देखरेख में पूरा होता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इस परंपरा पर विवाद हैं, लेकिन लोग इसे भगवान की कृपा मान कर विश्वास से करते हैं।

4) मुनियंडी स्वामी मंदिर – तमिलनाडु

तमिलनाडु में कई पुराने मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें से एक खास परंपरा मटन बिरयानी प्रसाद की भी है। यह परंपरा मदुरै जिले के पास मुनियंडी स्वामी मंदिर में देखने को मिलती है। यहां हर साल केवल तीन दिन के लिए श्रद्धालुओं को मटन बिरयानी का प्रसाद दिया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और ग्राम देवी पूजा तथा मुनियंडी स्वामी की आराधना से जुड़ी है। इन तीन दिनों में बहुत सारे लोग मंदिर आते हैं। पहले देवी-देवता को मटन का भोग लगाया जाता है, फिर वही मटन पकाकर बिरयानी के रूप में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्रसाद शक्ति और खुशहाली लाता है और इसे खाने से जीवन की नकारात्मकताएं दूर हो जाती हैं।

5) कामाख्या मंदिर – असम

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर को भारत के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर नीलांचल पर्वत पर है और मां कामाख्या देवी को समर्पित है, जिन्हें शक्ति का रूप माना जाता है। यहां एक पुरानी और खास परंपरा है, बकरे की बलि देना, जो खास पर्वों और तंत्र साधनाओं के दौरान की जाती है। मान्यता है कि मां कामाख्या को रक्त और बलि अर्पण करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। खासकर दुर्गा पूजा और अंबुबाची मेले में हजारों लोग यहां आते हैं और बकरे की बलि चढ़ाते हैं। बलि दिए गए बकरे का मांस बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है या भक्त उसे घर ले जाकर पकाते हैं। हालांकि कुछ लोग इसे लेकर विरोध भी करते हैं, फिर भी असम और पूर्वोत्तर के कई श्रद्धालु इसे आस्था का अहम हिस्सा मानते हैं।

6) मंच मुरगन मंदिर – केरल

केरल के केममोथ श्री सुब्रमण्य मंदिर में भगवान को चॉकलेट का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो एक अनोखी और खास परंपरा है। यह प्रथा लगभग 10 साल पहले शुरू हुई थी, जब एक छोटे बच्चे ने भगवान मुरगन को चॉकलेट अर्पित की और फिर वह बच्चे अचानक गायब हो गया। भक्त मानते हैं कि इस चमत्कार से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तभी से यह मंदिर ‘मंच मुरगन’ के नाम से जाना जाने लगा। यहां भक्त फूल या फल की जगह भगवान को चॉकलेट भोग के रूप में चढ़ाते हैं, और कुछ तो अपने वजन के बराबर चॉकलेट भी चढ़ाते हैं। शुरुआत बच्चों से हुई थी, लेकिन अब हर उम्र के लोग इस खास परंपरा में हिस्सा लेते हैं। माना जाता है कि भगवान मुरगन को उनके बालक स्वरूप में चॉकलेट बहुत पसंद है। यह 300 साल पुराना मंदिर इस अनोखे भोग के कारण और भी प्रसिद्ध हो गया है।

Keywords: Unique Prasad In Temples, Non-Vegetarian Temples, Chinese Kali Temple, Indian Culture Temples, Famous Temples Of India

What do you think?

- Advertisement -