- Advertisement -
- Advertisement -

गर्मी के बीच दिल्लीवासियों को बड़ा झटका! अब हर महीने बढ़ेगा बिजली बिल का रेट, जानें DERC का नया आदेश

दिल्ली
big blow for delhi residents amid summer heat electricity bills to rise every month know dercs new order

AI Generated

दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया बदलाव लागू किया गया है। अब बिजली बिल में PPAC (पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट) की वसूली हर महीने की जाएगी। पहले यह शुल्क तीन महीने में एक बार जोड़ा जाता था। नए आदेश के बाद उपभोक्ताओं के बिल में मासिक आधार पर बदलाव देखने को मिलेगा। राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में इसका असर अलग-अलग हो सकता है।

अलग-अलग इलाकों पर अलग असर

नए आदेश के तहत राजधानी के सभी उपभोक्ताओं पर समान प्रभाव नहीं पड़ेगा। टाटा पावर डीडीएल क्षेत्र के ग्राहकों के बिल में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जबकि बीएसईएस के दोनों वितरण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं पर ज्यादा अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने अप्रैल 2026 के लिए बिजली खरीद लागत समायोजन शुल्क (PPAC) वसूलने की मंजूरी दी है। खास बात यह है कि अब यह समायोजन तिमाही की बजाय हर महीने लागू किया जाएगा।

कंपनियों को मिली नई मंजूरी

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को बिजली खरीद लागत समायोजन शुल्क (PPAC) वसूलने की अनुमति दी है। आयोग ने कंपनियों की मांग की समीक्षा के बाद संशोधित दरों को मंजूरी दी है। नियामक संस्था ने कुछ मामलों में कंपनियों की मांग से कम शुल्क लागू करने की इजाजत दी, जबकि एक कंपनी को दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्तावित दर के अनुरूप स्वीकृति दी गई। इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

क्या होता है PPAC शुल्क?

PPAC एक ऐसा प्रावधान है जिसके जरिए बिजली उत्पादन और खरीद पर आने वाले अतिरिक्त खर्च को बिजली बिल में समायोजित किया जाता है। जब कोयला, गैस या अन्य ईंधन की कीमतों में बदलाव होता है, तो उसका असर बिजली कंपनियों की लागत पर पड़ता है। इसी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए यह शुल्क लगाया जाता है। देश के कई राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। नियामकों का मानना है कि इससे बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति संतुलित रहती है और उत्पादन कंपनियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो पाता है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित नहीं होती।

किस पर पड़ेगा असर, किसे मिलेगी राहत?

नई व्यवस्था का प्रभाव सभी उपभोक्ताओं पर समान नहीं होगा। जिन परिवारों को दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ मिलता है, उनके लिए फिलहाल अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना कम बताई जा रही है क्योंकि सब्सिडी यूनिट खपत के आधार पर तय होती है। वहीं अधिक बिजली उपयोग करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और गैर-सब्सिडी श्रेणी के ग्राहकों के बिल में अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है। इसके अलावा नियामक व्यवस्था में एक नया समायोजन प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिसके तहत भविष्य में बची हुई लागत को निर्धारित सीमा के भीतर धीरे-धीरे बिलों में शामिल किया जा सकेगा।

बिजली कंपनियों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

नियामकों का मानना है कि हाल के महीनों में ईंधन, कोयला और बिजली खरीद की लागत में बढ़ोतरी के कारण वितरण कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है। ऐसे में मासिक आधार पर लागत समायोजन की व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य कंपनियों को समय पर खर्च की भरपाई करने में मदद देना है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Keywords: Delhi Electricity Tariff Hike, DERC PPAC Charges, Delhi Power Consumers, Monthly Electricity Bill Increase

What do you think?

- Advertisement -