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शिल्पी-गौतम हत्याकांड का जिन्न निकला बाहर, गरमाई बिहार की सियासत, सम्राट चौधरी ने पीके को बताया “नौसिखिया”

बिहार क्राइम
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Photo Credit - X

बिहार की राजनीति एक बार फिर 1999 के चर्चित शिल्पी जैन और गौतम सिंह हत्याकांड को लेकर गरमा गई है। सोमवार को मीडिया से बातचीत में बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने प्रशांत किशोर (पीके) द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस ‘राकेश’ का ज़िक्र किया जा रहा है, वह हाजीपुर का एक व्यापारी था, न कि उनका नाम।

सम्राट चौधरी ने पीके पर बोला हमला

“यह नौसिखिया बच्चों की तरह बात कर रहा है। मैं विधानसभा में बार-बार बोल चुका हूं कि लालू यादव ने मुझे जेल भेजा था। तब नीतीश कुमार ने मेरे लिए 7 किलोमीटर पैदल चलकर आंदोलन किया था। शकुनी चौधरी दिवस मनाया गया था। बिहार की जनता सब जानती है।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है और वे आज ईमानदारी से जनता की सेवा कर रहे हैं। शिल्पी-गौतम हत्याकांड में अपना नाम जोड़ने को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा कि हाजीपुर का एक व्यापारी राकेश उस मामले में शामिल था, मेरा नाम कहीं नहीं है। यह जानकारी का अभाव है और सिर्फ मीडिया में बने रहने की कोशिश है।” सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि पीके जैसे लोग सिर्फ सनसनीखेज बयान देकर राजनीति करना चाहते हैं, जबकि जनता अब विकास के मुद्दों पर निर्णय लेगी।

“सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार थे संदिग्ध अभियुक्त”

इस विवाद की शुरुआत सोमवार को तब हुई जब पटना में प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए। पीके ने दावा किया कि सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार, 1999 के शिल्पी-गौतम हत्याकांड में एक संदिग्ध अभियुक्त थे। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने सम्राट का सैंपल लिया था और पूछताछ भी की थी, लेकिन लालू सरकार ने उस समय के दबाव में आकर केस को दबा दिया। इतना ही नहीं, पीके ने यह भी दावा किया कि सम्राट चौधरी पर छह हत्याओं का आरोप है और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी बर्खास्तगी की मांग की।

बिहार की राजनीति में शिल्पी-गौतम हत्याकांड की वापसी ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। जहां सम्राट चौधरी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं प्रशांत किशोर इसे न्याय और पारदर्शिता का मामला बता रहे हैं। अब देखना यह है कि इस मुद्दे का असर आगामी विधानसभा चुनावों और राज्य की राजनीति पर कितना पड़ेगा।

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