बादल फटना एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जिसमें बहुत कम समय में किसी छोटे इलाके में भारी बारिश होती है। यह ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में होता है, जहां बादल तेजी से नमी छोड़ते हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अगर एक घंटे में 20-30 वर्ग किलोमीटर के दायरे में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो, तो उसे बादल फटना कहते हैं। ऐसी बारिश इतनी तेज होती है कि नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। इससे अचानक बाढ़ आती है, जो घर, सड़कें और फसलों को बहा ले जाती है। मिसाल के तौर पर, 2013 में केदारनाथ में बादल फटने से हजारों लोग मारे गए थे।
भूस्खलन की सच्चाई
भूस्खलन तब होता है जब पहाड़ों की मिट्टी, पत्थर या दूसरी चीजें गुरुत्वाकर्षण की वजह से नीचे खिसकती हैं। यह भारी बारिश, भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या गैरकानूनी खनन जैसी वजहों से हो सकता है। भूस्खलन में मलबा तेजी से नीचे आता है और रास्ते में आने वाली हर चीज को नष्ट कर देता है। मंगलवार को जम्मू कश्मीर के कटरा में वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में 30 लोगों की मौत हो गई। मलबे में कई और लोगों के दबे होने की आशंका है।
कौन ज्यादा खतरनाक
बादल फटना और भूस्खलन दोनों ही जानलेवा हैं, लेकिन इनका असर अलग-अलग होता है। बादल फटने से बाढ़ बड़े इलाकों को प्रभावित करती है। यह पूरे गांव, शहर और खेतों को डुबो सकती है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। वहीं, भूस्खलन का दायरा छोटा होता है, लेकिन यह बहुत घातक हो सकता है। पिछले साल केरल के वायनाड में भूस्खलन से 93 लोग मारे गए थे। जहां बादल फटने से बड़े इलाके में तबाही फैलती है, वहीं भूस्खलन सीमित जगह पर भारी नुकसान करता है।
हाल की तबाही
जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस साल भारी बारिश ने खूब कहर बरपाया है। कटरा में हुए भूस्खलन ने वैष्णो देवी मार्ग को बुरी तरह प्रभावित किया। भारी बारिश की वजह से मिट्टी और पत्थर खिसके, जिससे कई लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है।
क्यों होती हैं ये आपदाएं
बादल फटने की घटनाएं ज्यादातर मानसून के दौरान होती हैं, जब नमी से भरी हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं। इससे बादल तेजी से बारिश छोड़ते हैं। भूस्खलन की वजहें भी बारिश से जुड़ी हैं, लेकिन अवैध खनन और जंगलों की कटाई इसे और बढ़ा देती हैं। जम्मू कश्मीर और हिमाचल जैसे पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाएं ज्यादा होती हैं, क्योंकि वहां की जमीन कमजोर और ढलान वाली होती है।
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