तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे महायुद्ध को रोकने के लिए जिस ‘शांति समझौते’ (Peace Deal) की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है, उसने खुद ईरान के अंदर एक नए ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। अमेरिका के साथ डील की शर्तों की भनक लगते ही ईरान में भारी बवाल मच गया है। कट्टरपंथी गुट और आम लोग सड़कों पर उतर आए हैं और विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
‘अराघची इस्तीफा दो’ के नारों से गूंजीं सड़कें
ईरान के मशहद (Mashhad) शहर से लेकर राजधानी तेहरान तक सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। विदेश मंत्रालय के दफ्तरों के बाहर भारी भीड़ जमा है जो लगातार “अराघची इस्तीफा दो” के नारे लगा रही है। लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। प्रदर्शनकारियों ने अराघची पर अमेरिका के सामने झुकने और देश की संप्रभुता का सौदा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है इस भारी बवाल की असली वजह?
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच डील फाइनल हो गई है, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाएगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को खोल देगा। जैसे ही यह खबर ईरान की मीडिया और अवाम तक पहुंची, कट्टरपंथियों का गुस्सा फूट पड़ा।
ईरानी हार्डलाइनर्स (कट्टरपंथियों) का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपना नियंत्रण छोड़ना और अमेरिका की शर्तों पर 60 दिन का सीजफायर मानना ईरान की अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक हार है।
‘यह शांति नहीं, सरेंडर है’
सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर हैं जिन पर लिखा है— “यह शांति नहीं, सरेंडर है।” कट्टरपंथी धड़े का साफ कहना है कि अमेरिका ने हाल ही में ईरानी नौसेना और भारतीय जहाजों पर जो क्रूर हमले किए हैं, उसके बाद बातचीत की मेज पर बैठना शहीदों का अपमान है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची को इस पूरी बातचीत का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है, इसीलिए उनके इस्तीफे की मांग सबसे ज्यादा जोर पकड़ रही है।
डील पर लटकी तलवार
ईरान के अंदर मचे इस बवाल ने इस बहुप्रतीक्षित शांति समझौते के भविष्य पर तलवार लटका दी है। अराघची और ईरानी सरकार इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं— एक तरफ अमेरिका की डेडलाइन और दूसरी तरफ अपने ही देश की सड़कों पर बगावत। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ईरानी सरकार जनता के दबाव के आगे झुकते हुए इस डील से पीछे हटती है, या अराघची की कुर्सी की बलि देकर समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा।
Keywords: Iran Protests 2026, Abbas Araghchi Resignation, US Iran Peace Deal, Iran Hardliners Protest, Mashhad Protests