रोम/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के समूह G7 का शिखर सम्मेलन इस बार बेहद तनावपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच हो रहा है। इस महासम्मेलन का सबसे बड़ा और गंभीर एजेंडा मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में भड़का विनाशकारी युद्ध है। एक तरफ जहां दुनिया की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच चल रही भयंकर तनातनी पर टिकी हैं, वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वैश्विक मंच से एक बार फिर दुनिया को ‘शांति और संवाद’ का सबसे कड़ा और अहम पैगाम देने जा रहे हैं।
ट्रंप और ईरान पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें
इस G7 समिट में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अघोषित युद्ध की हो रही है। हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में नागरिक जहाजों पर हुए हमलों और ट्रंप के ‘शांति समझौते’ के दावों के बाद पूरी दुनिया सांसें थाम कर बैठी है। G7 के सदस्य देश (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान) इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिडिल ईस्ट में बढ़ते खून-खराबे को कैसे रोका जाए। अगर यह युद्ध नहीं थमा, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
PM मोदी देंगे शांति का ‘महामंत्र’
इस वैश्विक महासंकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट के विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में एक बेहद अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी मिडिल ईस्ट के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट करेंगे कि संघर्ष और युद्ध से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता।
वह वैश्विक मंच पर भारत के उस दृढ़ स्टैंड को दोहराएंगे कि “यह युद्ध का युग नहीं है” (This is not an era of war)। पीएम मोदी जोर देंगे कि हिंसा को तुरंत रोककर कूटनीति (Diplomacy) और बातचीत के टेबल पर लौटना ही एकमात्र रास्ता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
G7 समिट में पीएम मोदी सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की मजबूत आवाज बनकर भी उभरेंगे। मिडिल ईस्ट में युद्ध का सबसे बुरा असर विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। पीएम मोदी विकसित देशों से यह अपील करेंगे कि वे जियो-पॉलिटिकल तनाव को कम करने के लिए जिम्मेदारी से काम करें ताकि गरीब और विकासशील देशों को इस युद्ध की भारी आर्थिक कीमत न चुकानी पड़े।
अब देखना यह है कि G7 के मंच से पीएम मोदी का यह शांति का पैगाम अमेरिका और ईरान के आक्रामक रुख को नरम करने में कितना कारगर साबित होता है।
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