केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात से जुड़े कर ढांचे में बदलाव करते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में बढ़ोतरी का फैसला किया है। जारी अधिसूचना के अनुसार डीजल निर्यात पर टैक्स बढ़ाया गया है, जबकि ATF पर भी शुल्क में उल्लेखनीय इजाफा किया गया है। नए कर की दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
पेट्रोल पर राहत, टैक्स यथावत
सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में फिलहाल कोई संशोधन नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले से लागू कर व्यवस्था को ही जारी रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार नई कर दरें निर्धारित तारीख से लागू होंगी और अगली समीक्षा तक प्रभावी रहेंगी। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कीमतों को देखते हुए इन दरों की समीक्षा करती रहेगी।
वैश्विक बाजार के हिसाब से तय होती हैं दरें
सरकार नियमित अंतराल पर निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों तथा रिफाइनिंग सेक्टर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बदलाव करती है। यह विशेष शुल्क केवल निर्यात से जुड़े उत्पादों पर लागू होता है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कर ढांचे को संतुलित रखना है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के बदलावों का घरेलू ईंधन की खुदरा कीमतों पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।
पहले दी गई थी निर्यातकों को राहत
हाल ही में सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष शुल्क में कमी की थी, जिससे तेल कंपनियों को कुछ राहत मिली थी। उस समय पेट्रोल और डीजल पर लागू निर्यात कर को घटाकर नई दरें तय की गई थीं। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और मांग की स्थिति को देखते हुए लिया गया था, ताकि निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
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